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भारतीय बैंकिंग सिस्टम की बड़ी छलांग, 2026 में मजबूती के शिखर पर पहुंचने का अनुमान

Indian banking system growth

Indian banking system growth

भारत का बैंकिंग सेक्टर 2026 में अब तक की सबसे मजबूत स्थिति में कदम रखता दिख रहा है। मजबूत आर्थिक रफ्तार, बेहतर एसेट क्वालिटी और बैंकों के पास मौजूद पर्याप्त पूंजी के दम पर यह सेक्टर आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह तैयार है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा जताते हुए इसका आउटलुक ‘स्टेबल’ बनाए रखा है। एजेंसी का कहना है कि अगले 12 से 18 महीनों तक बैंकों के लिए कारोबारी माहौल अनुकूल रहेगा, जिसे नीतिगत स्थिरता और घरेलू मांग का सहारा मिलेगा।

मूडीज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो जी-20 देशों में सबसे ज्यादा होगी। इससे बैंकों को कर्ज वितरण बढ़ाने और अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने में मदद मिलेगी। एजेंसी का मानना है कि देश की मजबूत आर्थिक स्थिति बैंकिंग सेक्टर के लिए एक ठोस आधार तैयार कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे बैंकिंग सिस्टम में कर्ज की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 11 से 13 फीसदी तक पहुंच सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह अब तक 10.6 फीसदी रही है। बढ़ता उपभोक्ता खर्च और सरकार की सहायक नीतियां कर्ज की मांग को मजबूती देंगी। हालांकि, निर्यात से जुड़े कुछ छोटे और मझोले उद्योगों पर दबाव रह सकता है, लेकिन मूडीज का मानना है कि बैंकों ने संभावित जोखिमों से निपटने के लिए पहले से ही पर्याप्त प्रावधान कर रखे हैं।

मूडीज को उम्मीद है कि बैंकों का एनपीए यानी खराब कर्ज अनुपात 2 से 2.5 फीसदी के दायरे में ही बना रहेगा। खुदरा कर्ज की गुणवत्ता स्थिर रहने की संभावना है, खासकर मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों में। वहीं, बड़ी कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति और मजबूत मुनाफे के चलते कॉरपोरेट लोन की गुणवत्ता भी अच्छी बनी रहेगी।

एजेंसी के अनुसार, आने वाले समय में बैंकों की मुनाफाखोरी में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा। जमा पर ब्याज दरों में समय के साथ नरमी आ सकती है, जबकि कर्ज पर ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2025 में की गई ब्याज दर कटौती का सकारात्मक असर बैंकों की आय पर दिखेगा, जिससे वित्त वर्ष 2027 में कुल मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है।

मूडीज ने यह भी कहा है कि भारतीय बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत बनी हुई है। पहले जुटाई गई पूंजी और आंतरिक आय के चलते फिलहाल नई पूंजी जुटाने की बड़ी जरूरत नहीं दिखती। हालांकि, अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए अंतरराष्ट्रीय लेखा मानकों और बैंकिंग नियमों का पूंजी अनुपात पर हल्का असर पड़ सकता है, लेकिन इसका कुल प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों की फंडिंग और लिक्विडिटी स्थिति भी स्थिर बनी रहेगी। कर्ज और जमा की रफ्तार लगभग बराबर रहने की संभावना है। साथ ही, मूडीज ने दोहराया कि सरकारी बैंकों को सरकार का मजबूत समर्थन मिलता रहेगा, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और स्थिर बना रहेगा।

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