Last Updated: September 23, 2026

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भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी, ‘एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन’ से बाहर आकर निवेश के मौके बढ़े

April 11, 2026

भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी, ‘एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन’ से बाहर आकर निवेश के मौके बढ़े

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार अब “एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन” से बाहर निकल चुका है और यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक एंट्री पॉइंट बनकर उभर रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे स्तरों से निवेश करने पर एक साल में औसतन 17.5 प्रतिशत से अधिक रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जब निफ्टी 500 के 70 प्रतिशत से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करने लगते हैं, तो बाजार ‘एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन’ में पहुंच जाता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में डर (फियर) हावी हो गया है और फंडामेंटल्स को नजरअंदाज किया जा रहा है।

वर्तमान में करीब 71.3 प्रतिशत शेयर इस स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार ‘कैपिटुलेशन जोन’ में रहा है और अब रिकवरी के संकेत दिखा रहा है।

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रिपोर्ट के अनुसार, हालिया गिरावट के दौरान अलग-अलग मार्केट कैप सेगमेंट में जोखिम की भावना में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जहां बड़े शेयरों की तुलना में 1,000 बेसिस पॉइंट से अधिक की गिरावट देखी गई, जिनमें से करीब 61 प्रतिशत स्मॉल-कैप शेयरों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है और इनका औसत रिटर्न -17 प्रतिशत रहा है। वहीं मिड-कैप सेगमेंट में लगभग 51 प्रतिशत शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूटे हैं।

इसके विपरीत, लार्ज-कैप शेयर अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे, जहां केवल 32 प्रतिशत शेयरों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रिकवरी का एक अहम संकेत ऊर्जा कीमतों में तेजी से सामान्य होना है। ऐतिहासिक रूप से कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर होने में औसतन 30 सप्ताह का समय लगता है, लेकिन हालिया घटनाओं में यह समय महीनों से काफी कम होकर कुछ ही हफ्तों में सिमट गया है, क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान सप्लाई शॉक केवल लगभग 9 सप्ताह तक ही रहा, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार अब पहले की तुलना में तेजी से झटकों को समाहित कर रहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उभरते बाजारों (एमर्जिंग मार्केट्स-ईएम) के मुकाबले भारत का प्राइस-टू-अर्निंग (पीई) प्रीमियम काफी कम हो गया है। यह 2022 में 1.57 गुना के उच्च स्तर से घटकर अब 0.38 गुना पर आ गया है, जिससे भारतीय बाजार की वैल्युएशन अब ज्यादा आकर्षक नजर आ रही है।

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