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2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है भारत की जैव-अर्थव्यवस्था : नीति आयोग

नई दिल्ली: नीति आयोग की नई रिपोर्ट में कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कृषि, वानिकी, मत्स्य और जलीय कृषि जैसे क्षेत्र इस जैव-अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं। रिपोर्ट में बताया कि किसी भी देश की खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता के लिए एक मजबूत कृषि प्रणाली जरूरी है। कृषि के तकनीकी रूपांतरण को भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य का अहम हिस्सा बताया गया है। रिपोर्ट जारी करते गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि राज्य और देश में खेती के हर चरण में प्रौद्योगिकी को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

रिपोर्ट में जलवायु-प्रतिरोधी बीज, सटीकता आधारित खेती, डिजिटल ट्विन्स, एजैंटिक एआई और उन्नत कृषि मशीनों को भविष्य की कृषि वृद्धि के लिए जरूरी बताया गया है। नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत में हर किसान की स्थिति अलग है, इसलिए तकनीकी समाधान भी उसी के अनुरूप तैयार किए जाने चाहिए। रिपोर्ट में किसानों को तीन वर्गों — आकांक्षी (70-80%), संक्रमणकालीन (15-20%) और उन्नत (1-2%) — में बांटकर हर वर्ग के लिए अलग समाधान सुझाए गए हैं। नीति आयोग का मानना है कि सही नीतिगत कदमों से भारत कृषि क्षेत्र में नई स्थायित्व क्षमता, ग्रामीण समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का नया स्तर हासिल कर सकता है।

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