
नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 26 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। इसकी वजह चक्रीय रिकवरी और मार्कीट का मजबूत प्रदर्शन करना है। ये जानकारी वीरवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। चक्रीय रिकवरी का मतलब उस चरण से है, जहां अर्थव्यवस्था धीमेपन से उभरती है और इस दौरान आर्थिक गतिविधि, कंज्यूमर खर्च और बिजनैस निवेश में बढ़त देखी जाती है। लाइटहाऊस कैंटन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में भारत में मजबूत आय वृद्धि देखी गई है और इस दौरान निफ्टी इंडैक्स ने 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, विकास का अगला चरण सरकारी पूंजीगत व्यय, मध्यम वर्ग को टैक्स में दी गई छूट और बेहतर उपभोक्ता मांग जैसे प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में कहा कि इन कारकों से 2025 में आय में सुधार और बाजार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा फरवरी में रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की गई है।
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