Last Updated: November 6, 2026

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भारत की स्पेस इकोनॉमी में तेज बढ़ोतरी का अनुमान, 2033 तक पहुंचेगी 44 अरब डॉलर

September 12, 2026

भारत की स्पेस इकोनॉमी में तेज बढ़ोतरी का अनुमान, 2033 तक पहुंचेगी 44 अरब डॉलर

बिजनेस डेस्क- नई दिल्ली नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण भारत की स्पेस इकोनॉमी 2033 तक बढ़कर 4.22 लाख करोड़ रुपए (44 अरब डॉलर) तक पहुंच सकती है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

ईवाई और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के जरिए किए गए सुधारों और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) की भूमिका ने सरकारी नेतृत्व वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम से अधिक उद्योग-केंद्रित इकोसिस्टम की ओर बदलाव की नींव रखी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमानित वृद्धि हासिल करने के लिए अगले 7-8 वर्षों में सरकारी एजेंसियों, उद्योग, स्टार्टअप्स, निवेशकों, अकादमिक संस्थानों और रणनीतिक उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। देश के स्पेस सेक्टर को तेजी से बढ़ाने के लिए रिपोर्ट में कार्रवाई के लिए छह प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में अंतरिक्ष आधारित एप्लिकेशन के इस्तेमाल को बढ़ाना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्च क्षमता को मजबूत करना, नियामकीय और वित्तीय माहौल में सुधार, व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकारी मांग का लाभ उठाना, रक्षा और रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करना और भारत को वैश्विक स्पेस पार्टनर और स्पेस एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करना शामिल हैं।

इसके अलावा, पूरी स्पेस वैल्यू चेन में सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, लॉन्च व्हीकल, प्रोपल्शन सिस्टम और एवियोनिक्स जैसी अपस्ट्रीम गतिविधियां शामिल हैं। इसके बाद मिडस्ट्रीम सेगमेंट में ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सैटेलाइट ऑपरेशंस आते हैं, जबकि डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशंस में अर्थ ऑब्जर्वेशन (ईओ), सैटेलाइट कम्युनिकेशन, नेविगेशन सेवाएं और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स शामिल हैं।

सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन स्पेस के चेयरमैन मल्लावरपु अप्पाराव ने कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर वैज्ञानिक खोज के कार्यक्रम से आगे बढ़कर सैटेलाइट आधारित सेवाओं और एप्लिकेशंस से समर्थित इनोवेशन-ड्रिवन इकोनॉमी बन गया है। ईवाई इंडिया में एयरोस्पेस, डिफेंस एंड स्पेस के पार्टनर सीडीआर गौतम नंदा ने कहा कि विकास के अगले चरण के लिए औद्योगिक क्षमता बढ़ाना, तकनीकों का व्यावसायीकरण करना, सप्लाई चेन मजबूत करना और सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा को व्यावसायिक, सार्वजनिक और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए उपयोगी सेवाओं में बदलना महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, डाउनस्ट्रीम स्पेस एप्लिकेशन कृषि, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, जलवायु परिवर्तन से निपटने और शासन व्यवस्था में तेजी से मदद कर रहे हैं। ये एप्लिकेशन सुरक्षित संचार और समुद्री क्षेत्र की निगरानी के जरिए भारत की रक्षा क्षमताओं को भी मजबूत कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्पेस इकोनॉमी से ज्यादा आर्थिक मूल्य हासिल करने के लिए सैटेलाइट डेटा का व्यापक इस्तेमाल, बेहतर डेटा एनालिटिक्स क्षमता, कुशल प्रतिभाओं और आपस में जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना जरूरी होगा।

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