भारत में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जनवरी में सालाना आधार पर 1.81 प्रतिशत रही। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी की गई।
सरकारी बयान के अनुसार, महंगाई में बढ़ोतरी की मुख्य वजह बेसिक मेटल, मैन्युफैक्चरिंग और गैर-खाद्य उत्पादों के साथ-साथ खाद्य वस्तुओं और टेक्सटाइल की कीमतों में इजाफा रहा।
खाद्य सूचकांक, जिसमें प्राथमिक वस्तुओं के समूह से खाद्य पदार्थ और विनिर्मित उत्पादों के समूह से खाद्य उत्पाद शामिल हैं, दिसंबर 2025 के 196.0 से घटकर जनवरी 2026 में 194.2 पर आ गया। हालांकि, सालाना आधार पर थोक महंगाई दर पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में बढ़कर 1.41 प्रतिशत दर्ज की गई।
डब्ल्यूपीआई में विनिर्माण समूह का भार 64.23 प्रतिशत है। इस समूह में जनवरी के दौरान 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 22 विनिर्मित उत्पाद समूहों में से 19 की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि तीन समूहों में गिरावट रही। जिन क्षेत्रों में कीमतें बढ़ीं, उनमें बेसिक मेटल, खाद्य उत्पाद, वस्त्र, अन्य विनिर्माण और विद्युत उपकरण प्रमुख रहे।
वहीं, दवाइयों का निर्माण, औषधीय रसायन एवं वनस्पति उत्पाद, मशीनरी और उपकरण तथा फर्नीचर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा नए बेस ईयर 2024 के आधार पर जारी किया गया है, जिसे पहले 2012 रखा गया था। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी, जो पुराने बेस ईयर पर आधारित थी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, जनवरी में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 2.73 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.77 प्रतिशत रही। खाद्य महंगाई दर 2.13 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें ग्रामीण इलाकों में 1.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.44 प्रतिशत की दर रही।

