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ग्लोबल दबाव के बीच मैन्युफैक्चरिंग PMI फिसला, रोजगार संकेत सकारात्मक

manufacturing PMI India fall global pressure employment positive outlook

manufacturing PMI India fall global pressure employment positive outlook

एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े व्यवधानों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, साथ ही इसका असर भारतीय उद्योगों पर भी दिख रहा है, जिसके चलते मार्च में भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई घटकर 53.9 पर आ गया।

कंपनियों पर लागत का दबाव भी बढ़ा है, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे ज्यादा स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, पीएमआई डेटा तैयार करने वाली एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद ही संभाला, क्योंकि बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी पिछले दो साल में सबसे कम रही।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कंपनियों ने संभावित जोखिम से बचने के लिए अतिरिक्त स्टॉक जमा किया, जिससे रोजगार सृजन और कच्चे माल की खरीद में बढ़ोतरी देखने को मिली।

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एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “उत्पादन और नए ऑर्डर में कमी आई है, जो मांग में नरमी और बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है। वहीं, एल्युमिनियम, केमिकल और ईंधन जैसी चीजों की लागत तेजी से बढ़ी है। फिलहाल कंपनियां इस बढ़ोतरी का असर खुद झेल रही हैं, जिससे कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है।”

मार्च के आंकड़ों के अनुसार, इनपुट लागत में साढ़े तीन साल में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि एल्युमिनियम, केमिकल्स, ईंधन, जूट, लेदर, कपड़ा, तेल, रबर और स्टील जैसी चीजों के दाम बढ़े हैं।

इसके अलावा, भारतीय कंपनियों ने उत्पादन के लिए अतिरिक्त कच्चा माल खरीदना जारी रखा और अपने स्टॉक को भी बढ़ाया।

रिपोर्ट में कहा गया कि कुल वृद्धि की रफ्तार तीन महीने के निचले स्तर पर जरूर आई है, लेकिन यह ऐतिहासिक रूप से अब भी मजबूत बनी हुई है। कंपनियों ने बिक्री में बढ़ोतरी और सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के प्रयासों को इस सुधार का कारण बताया।

खास बात यह रही कि सप्लायर्स समय पर कच्चा माल पहुंचाने में सक्षम रहे, जिससे वेंडर परफॉर्मेंस में सुधार देखा गया।

सकारात्मक संकेत यह भी है कि भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट ऑर्डर में पिछले साल सितंबर के बाद सबसे तेज वृद्धि हुई। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोप, जापान, मध्य पूर्व, तुर्की और वियतनाम जैसे देशों से मांग बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा रोजगार बढ़ाया और आने वाले साल के लिए उत्पादन को लेकर अधिक आशावादी नजर आईं।

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