
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। आज सुबह कारोबार शुरू होते ही बाजार में भारी बिकवाली छा गई, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया।
Bombay Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 900 अंकों से अधिक टूटकर 76,500 के आसपास आ गया। वहीं National Stock Exchange का निफ्टी भी तेज गिरावट के साथ 24,000 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
शुरुआती कारोबार में ही गिरावट का दायरा काफी व्यापक रहा। ज्यादातर सेक्टर्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। खासतौर पर बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों की तुलना में काफी ज्यादा रही, जो बाजार की कमजोरी को साफ दर्शाता है।

कच्चे तेल की तेजी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। वैश्विक तनाव, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता, तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा रही है। कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
तेल महंगा होने से महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा रहता है, जिसका असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए तेजी से शेयर बेचने शुरू कर दिए।
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आगे क्या करें निवेशक?
बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते और तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने, लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहने और घबराहट में फैसले न लेने की सलाह दी जा रही है।
इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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