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Business: सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की गिरावट, मिडकैप शेयरों ने दिखाई तेजी

Sensex-Nifty fall slightly, midcap stocks show rise

Sensex-Nifty fall slightly, midcap stocks show rise

Business Update: सेंसेक्स, निफ्टी हल्की गिरावट के साथ बंद, मिडकैप शेयरों में रही तेजी

भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक बुधवार के कारोबारी सत्र में हल्की गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में सेंसेक्स 102.20 अंक या 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 84,961.14 और निफ्टी 37.95 अंक या 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,140.75 पर था।

लार्जकैप में तो गिरावट रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 276.15 अंक या 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,424.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.65 अंक या 0.40 प्रतिशत की मजबूती के साथ 17,958.50 पर बंद हुआ।

सेक्टोरल आधार पर निफ्टी आईटी (1.87 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.69 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.69 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस ( 0.65 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (0.07 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।

दूसरी तरफ निफ्टी ऑटो (0.80 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.66 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (0.50 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.33 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.31 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, सन फार्मा, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एलएंडटी, बीईएल और ट्रेंट गेनर्स थे। मारुति सुजुकी, पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, एचयूएल, एसबीआई, भारती एयरटेल, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, इंडिगो और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, “2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों और अमेरिका के अहम रोजगार आंकड़ों से पहले जोखिम से बचने के संकेतों के चलते घरेलू बाजार का माहौल सतर्क बना हुआ है।

तिमाही आधार पर कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल और वित्तीय क्षेत्र में मुनाफावसूली से सूचकांकों पर दबाव बना हुआ है।

हालांकि आईटी, फार्मा और मिड-कैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी से कुछ हद तक राहत मिली है।” उन्होंने आगे कहा, “वैश्विक अस्थिरता के बीच चीन द्वारा दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से आपूर्ति श्रृंखला के जोखिम बढ़ गए हैं। इससे शेयर बाजार के सीमित दायरे में रहने की संभावना है।”

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