
नए साल 2026 के पहले महीने जनवरी के लिए म्यूचुअल फंड्स के आंकड़े मंगलवार को सामने आए, और इनमें निवेशकों का रुझान साफ तौर पर झलकता है। एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के मुताबिक, जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। इस सेगमेंट में करीब 50 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और मासिक निवेश के मामले में यह पूरे इक्विटी म्यूचुअल फंड सेगमेंट में सबसे आगे रहा।
जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में निवेश दोगुना होकर 24,039.96 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि दिसंबर में यह 11,647 करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि निवेशक शेयर बाजार के साथ-साथ सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
वहीं, जनवरी में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 24,029 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो दिसंबर के 28,054 करोड़ रुपये से करीब 14 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद यह माना जा रहा है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेशकों का भरोसा अब भी बना हुआ है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर में इक्विटी फंड्स में 29,911 करोड़ रुपये का निवेश आया था, जबकि अक्टूबर में यह 24,690 करोड़ रुपये रहा। जुलाई 2025 में इक्विटी फंड्स ने अब तक का सबसे बड़ा इन्फ्लो देखा था, जब 42,702 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया था।
कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिहाज से जनवरी काफी बेहतर महीना रहा। इस दौरान 1.56 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जबकि दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। यह संकेत है कि निवेशकों का रुझान एक बार फिर म्यूचुअल फंड्स की ओर बढ़ रहा है।
एक्टिव इक्विटी फंड्स की अलग-अलग कैटेगरी में मिला-जुला निवेश देखने को मिला। लार्ज-कैप फंड्स में जनवरी में 2,004 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो दिसंबर के 1,567 करोड़ रुपये से ज्यादा है। मिड-कैप फंड्स में 3,185.47 करोड़ रुपये का निवेश आया, हालांकि यह दिसंबर के 4,176 करोड़ रुपये से कम रहा। स्मॉल-कैप फंड्स में भी निवेश घटकर 2,942.11 करोड़ रुपये रहा, जबकि दिसंबर में यह 3,824 करोड़ रुपये था।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स निवेश के मामले में सबसे आगे रहे, जहां 7,672.36 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। इसके अलावा सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स में भी सुधार दिखा। इस श्रेणी में जनवरी में 1,042 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो पिछले महीने के मुकाबले करीब 9.2 प्रतिशत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि निवेशक खास सेक्टर आधारित फंड्स में भी रुचि ले रहे हैं।
डेट फंड्स के लिए जनवरी का महीना खासा मजबूत रहा। दिसंबर में भारी निकासी के बाद जनवरी में डेट फंड्स में 74,827.13 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि दिसंबर में 1.32 लाख करोड़ रुपये का बहिर्वाह हुआ था। ओवरनाइट फंड्स में 46,280 करोड़ रुपये और लिक्विड फंड्स में 30,681.55 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो सुरक्षित निवेश विकल्पों में बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
हाइब्रिड और पैसिव फंड्स में भी निवेश बढ़ा। जनवरी में हाइब्रिड स्कीम्स में 17,356.02 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि दिसंबर में यह 10,755.57 करोड़ रुपये था। आर्बिट्रेज फंड्स में भी निवेश बढ़कर 3,293.30 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले महीने महज 126.31 करोड़ रुपये था।
जनवरी में एक्टिव इक्विटी में एनएफओ के जरिए कुल 806 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इस महीने सबसे ज्यादा एनएफओ सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स के रहे, जिनमें दो नए फंड लॉन्च किए गए। कुल मिलाकर जनवरी में अलग-अलग श्रेणियों में 12 नए म्यूचुअल फंड लॉन्च हुए, जिनसे करीब 1,939 करोड़ रुपये जुटाए गए। भले ही यह आंकड़ा दिसंबर से कम रहा हो, लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी नए फंड्स में बनी रही।
एसआईपी के जरिए हर महीने होने वाला निवेश 31,002 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा, जो निवेशकों के लंबे समय के भरोसे को दर्शाता है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल रिसर्चर हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश प्रवाह सकारात्मक बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह लगातार आने वाला एसआईपी निवेश और भारतीय शेयर बाजार की लंबी अवधि की विकास संभावनाओं पर निवेशकों का भरोसा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुल निवेश में आई हल्की गिरावट का कारण मिड और स्मॉल कैप सेगमेंट में सुस्ती रही, जबकि जनवरी में लार्ज कैप और फोकस्ड फंड्स में दिसंबर के मुकाबले बेहतर खरीदारी देखने को मिली।
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