Toll Plazas: नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले ड्राइवर्स के लिए बड़ी खबर है। सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन को पूरी तरह बंद करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य टोल कलेक्शन को डिजिटल बनाना और हाईवे पर लंबी कतारों और जाम की समस्या को खत्म करना है।
डिजिटल मोड बनेगा मुख्य माध्यम
सरकार की योजना के तहत आने वाले समय में टोल का भुगतान सिर्फ डिजिटल माध्यम से ही किया जाएगा। इसमें FASTag और UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रमुख होंगे। वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर किसी वाहन में वैध FASTag नहीं है या FASTag काम नहीं कर रहा है, तो उस वाहन से रेगुलर टोल का दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं, जो लोग UPI के जरिए भुगतान करना पसंद करते हैं, उन्हें टोल की राशि का 1.25 गुना देना होता है।
एक अधिकारी ने बताया, “UPI पेमेंट नवंबर में कैश कम करने के विकल्प के तौर पर शुरू किया गया था। तब यह कुल टोल कलेक्शन का सिर्फ 2% था। अब तक कैश पेमेंट में लगभग 1% की गिरावट देखी गई है। सभी टोल प्लाजा पर UPI सिस्टम उपलब्ध है।”
कैश हटाने के पीछे की वजहें
NHAI का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन से टोल प्लाजा ऑपरेशन की एफिशिएंसी बढ़ती है और भरोसेमंद पेमेंट सिस्टम सुनिश्चित होता है।
कैशलेस सिस्टम अपनाने से हाईवे पर लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम कम होंगे। नकद लेनदेन में समय अधिक लगता है पैसे गिनने, छुट्टा देने और रसीद बनाने में जिसकी वजह से कई बार गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती है। डिजिटल पेमेंट से वाहन बिना रुके हाईवे से गुजर सकेंगे।
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आर्थिक और समय की बचत
अध्ययनों के अनुसार, टोल पेमेंट को डिजिटल करने से देश को सालाना लगभग 87,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इसके अलावा, ड्राइवर और टोल कर्मचारियों के बीच पैसे के लेनदेन को लेकर होने वाली झगड़े भी खत्म हो जाएंगे। सरकार की योजना है कि भविष्य में बैरियर-फ्री टोलिंग लागू की जाए, यानी वाहन उसी गति से चलते हुए टोल कट जाएगा। इसके लिए कैशलेस भुगतान अनिवार्य होगा।
सरकार का यह कदम न केवल टोल पेमेंट को पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि हाईवे यात्रा को आसान और समय की बचत करने वाला बनाएगा।
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