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नए वित्त वर्ष में बड़े बदलाव, टैक्स सिस्टम से लेकर कई नियम 1 अप्रैल से लागू

new financial year changes India tax rules April 1 updates

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भारत में नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश के डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने जा रहा है, जो करीब 60 साल पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा, और इसमें नियमों, शब्दावली और टैक्स व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं।

नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर (एफवाई)’ और ‘असेसमेंट ईयर (एवाई)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ होगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने और लोगों को ज्यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन वही रहेगी, लेकिन जो लोग ऑडिट के दायरे में नहीं आते (जैसे सेल्फ-एम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स), उन्हें अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित फैसले के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी।

हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) क्लेम करने के नियम सख्त किए गए हैं। अब कुछ मामलों में मकान मालिक की जानकारी जैसे पैन देना जरूरी होगा। साथ ही, ज्यादा एचआरए छूट वाले शहरों की सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है।

सरकार ने कर्मचारियों को कुछ राहत भी दी है। मील (भोजन) से जुड़े टैक्स बेनिफिट बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सालाना सीमा भी बढ़ाई गई है। पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।

अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन के रूप में लगेगा, जिससे निवेशकों पर असर पड़ेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगी जो मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए हों।

नए नियमों के तहत अब डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज को टैक्स में छूट के रूप में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।

अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र जमा करके कई इनकम स्रोतों पर टीडीएस से बच सकते हैं। एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस काटने के लिए अब टीएएन की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ पैन से काम हो जाएगा।

विदेश यात्रा पर टीसीएस घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी टीसीएस कम किया गया है।

अब टैक्सपेयर्स को रिटर्न में सुधार (रिवाइज) करने के लिए 31 मार्च तक का समय मिलेगा, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

इसके अलावा, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे पर प्राप्त ब्याज को पूरी तरह से कर-मुक्त कर दिया गया है।

वहीं, सरकार ने आकलन वर्ष 2-26-27 के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म (आईटीआर-1 से आईटीआर-7 तक) नोटिफाई कर दिए हैं, जिससे व्यक्तियों, पेंशनभोगियों और अन्य करदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने रिटर्न दाखिल करना शुरू करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अपडेट किए गए फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म में दो मकानों से होने वाली आय भी दिखाई जा सकती है, जबकि पहले यह सीमा एक मकान तक ही थी। इससे कई करदाताओं के लिए फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

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