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Jindal Steel को NGT का निर्देश, विस्फोट पीड़ितों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये दें

March 3, 2023

Jindal Steel को NGT का निर्देश, विस्फोट पीड़ितों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये दें

नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) को विस्फोट में मारे गए उसके दो कर्मचारियों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पत्रलापली गांव में स्थित जेएसपीएल की फैक्ट्री में विस्फोट 10 जून, 2020 को हुआ था। एनजीटी की बेंच ने जेएसपीएल को एक महीने के भीतर घायलों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। जस्टिस ए.के. गोयल की खंडपीठ ने कहा, ‘‘भुगतान में चूक होने पर जिला मजिस्ट्रेट वसूली के लिए कठोर कदम उठा सकते हैं, जिसमें बिजली काटना भी शामिल है।’’

कन्हैया लाल पोद्दार और जयमन खेलकोन, जो इस घटना में लगभग 90 प्रतिशत झुलस गए थे, की 12 जून, 2020 को एक अस्पताल में मौत हो गई, जबकि अरविंद कुमार सिंह और लालूराम घायल होने से बच गए। विशेषज्ञ सदस्यों ए. सेंथिल वेल और अफरोज अहमद के साथ न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से इस मामले में आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया। एनजीटी की बेंच ने कहा कि यह आदेश जेएसपीएल की किसी अन्य दीवानी या आपराधिक देनदारी पर रोक नहीं लगाएगा। बेंच ने कहा ‘‘हम औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (डीआईएसएच) को इकाई द्वारा अपनाए गए सुरक्षा मानदंडों का ऑडिट करने का निर्देश देते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।’’

एनजीटी ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर इस मामले में कार्यवाही स्वत: शुरू की थी। हरित पीठ ने यह भी देखा कि घायल कर्मियों को उचित उपचार और न्याय से वंचित किया गया था। पीठ ने कहा, ‘‘पर्यावरणीय सुरक्षा मानदंडों का पालन करने में स्थापना की विफलता के कारण दो श्रमिकों की मौत हुई और दो अन्य जीवित श्रमिक जलने से जख्मी हो गए। खतरनाक गतिविधियों में लगे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान पर किसी को चोट लगने या जीवन की हानि होने पर वित्तीय सहायता देने का दायित्व है।’’ पीठ ने आगे कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, आईपीसी की धारा 304ए के दायरे में आने वाले अपराधों के लिए कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई है और केवल उन प्रबंधकों के खिलाफ कारखाना अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार व्यवसाय इकाई के रूप में जेएसपीएल से अपेक्षा की जाती है कि वह अपेक्षित मानदंडों का पालन करने में विफलता के कारण लोगों की जान जाने और घायल होने के प्रति संवेदनशीलता दिखाए, लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने घटना के दो साल बाद भी उचित कदम नहीं उठाया है।’’ एनजीटी ने कहा, ‘‘कर्तव्य करने के बजाय केवल इच्छा की अभिव्यक्ति कुछ भी नहीं है। हमने पाया कि प्रतिष्ठान ने एक जिम्मेदार व्यवसाय इकाई की तरह अपेक्षित चिंता नहीं दिखाई है। हमें आशा है कि कानूनी सेवा प्राधिकरण पीड़ितों तक पहुंचकर उन्हें न्याय तक पहुंच प्रदान करेगा।’’

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