
Ola-Uber Driver Strikes: देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ऐप-आधारित कैब और डिलीवरी ड्राइवरों ने आज, 7 फरवरी, 2026 को हड़ताल का ऐलान किया है। ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने लंबे समय से चली आ रही कमाई असुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में यात्रियों को सेवाओं की कमी और बढ़े हुए किराए का सामना करना पड़ा।
हड़ताल का नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) कर रहे हैं। यह प्रदर्शन पिछले साल दिसंबर में हुई डिलीवरी बॉय हड़ताल के बाद गिग वर्कर्स का दूसरा बड़ा आंदोलन माना जा रहा है।
ड्राइवरों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी ‘मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025’ को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि कंपनियां इन दिशानिर्देशों को नजरअंदाज करते हुए किराया तय कर रही हैं, जिससे लाखों ड्राइवरों की आमदनी असुरक्षित हो गई है।
ड्राइवरों की प्रमुख मांगें
न्यूनतम किराए का निर्धारण: सरकार तुरंत ऐप-आधारित सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया तय करे, जो यूनियनों के साथ परामर्श के बाद तय किया जाए।
पारदर्शी निगरानी: कंपनियों द्वारा किराया तय करने में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक सरकारी पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए।
निजी वाहनों पर प्रतिबंध: सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों के कमर्शियल उपयोग पर रोक लगाई जाए ताकि पेशेवर ड्राइवरों की कमाई प्रभावित न हो।
इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र कामगार सभा ने ड्राइवरों पर पड़ रहे पैनिक बटन के अतिरिक्त आर्थिक बोझ को भी मुद्दा बनाया है। सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए पैनिक बटन लगाने के लिए ड्राइवरों को पुराने उपकरण हटाकर नए बटन पर लगभग 12,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जो उनकी कमाई पर भारी असर डाल रहा है।
भारत टैक्सी और हड़ताल का समय
दिलचस्प बात यह है कि यह हड़ताल दिल्ली में सरकार समर्थित ‘भारत टैक्सी’ ऐप के लॉन्च के ठीक बाद हुई है। यह नया प्लेटफॉर्म शून्य कमीशन और बिना सर्ज प्राइसिंग के मॉडल का वादा करता है, जिससे ड्राइवरों को एक वैकल्पिक और बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद है।
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कंपनियों और सरकार का रुख
ओला, उबर और रैपिडो ने अभी तक इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। वहीं विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को संसद में उठाया। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा और कंपनियों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। इस हड़ताल से स्पष्ट है कि ऐप-आधारित कैब सेवाओं में काम करने वाले लाखों ड्राइवरों की कमाई और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार की आवश्यकता अब और अधिक तात्कालिक हो गई है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...