Petrol-Diesel Rate Hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पांच दिनों में लगातार 2 बार बढ़ चुकी हैं। बीते दिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह लगातार दूसरा मौका है जब ईंधन के दामों में इजाफा हुआ है। इससे पहले भी पिछले कुछ दिनों में दोनों ईंधनों की कीमतों में लगभग तीन रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई थी।
हालांकि, यह बढ़ोतरी बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अभी बेहद सीमित मानी जा रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह राहत काफी नहीं है और आगे और बड़े दाम बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि मौजूदा समय में OMCs को प्रतिदिन लगभग 800 से 900 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगर स्थिर या ऊंची बनी रहती हैं, तो यह घाटा और बढ़ सकता है। फिलहाल कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है, जिससे रिफाइनिंग कंपनियों पर हर महीने हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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कितना बढ़ सकता है दाम?
कोटक की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मौजूदा नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 13 से 17 रुपये प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। वर्तमान में कंपनियों को डीजल पर लगभग 11.40 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 14.30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों ने इस स्थिति को “ऊंट के मुंह में जीरा” बताते हुए कहा है कि हालिया मामूली बढ़ोतरी बड़े वित्तीय अंतर को भरने के लिए पर्याप्त नहीं है।

