नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 नवंबर को भूटान दौरे पर रहेंगे। यह दौरा न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी इस अवसर पर अध्यात्म, व्यापार और विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
दौरे के दौरान पीएम मोदी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष की पूजा करेंगे। भारत और भूटान के बीच बौद्ध धर्म और अध्यात्म का गहरा संबंध है, और भूटान में भगवान बुद्ध के धार्मिक स्थल पर भारी संख्या में लोग आते हैं।
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व्यापारिक मोर्चे पर भारत भूटान का सबसे बड़ा साझेदार रहा है। 2024 में भारत का भूटान के साथ द्विपक्षीय व्यापार 12,669 करोड़ रुपए था, जिसमें भारत का निर्यात 9,538 करोड़ रुपए और आयात 3,131 करोड़ रुपए रहा। भारत और भूटान के बीच मुक्त व्यापार व्यवस्था और व्यापारिक मार्गों की सुविधा दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाती है। हाल ही में भूटान के लिए उर्वरक आपूर्ति पर बी2बी समझौता भी हुआ।
दोनों देशों ने संपर्क और कनेक्टिविटी बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। सीमा पार रेलवे और सड़क संपर्क, एकीकृत चेक पोस्ट और नए व्यापार मार्ग इसके उदाहरण हैं। 29 सितंबर 2025 को भारत और भूटान ने दो रेल संपर्क (कोकराझार-गेलेफू और बानरहाट-समत्से) के लिए अंतर-सरकारी समझौता किया, जिसकी अनुमानित लागत 4,033.34 करोड़ रुपए है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने भूटान में 3,156 मेगावाट की पांच प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं विकसित की हैं। साथ ही फिनटेक, रुपे कार्ड और भीम यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म भी भारत-भूटान ट्रेड पार्टनरशिप को बढ़ावा दे रहे हैं।
इस दौरे से दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।
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