Last Updated: October 17, 2026

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेगाबालिन को शेड्यूल एच1 में शामिल किया, दुरुपयोग पर रोक

May 22, 2026

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेगाबालिन को शेड्यूल एच1 में शामिल किया, दुरुपयोग पर रोक

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने ड्रग्स नियम, 1945 की अनुसूची एच1 के तहत ‘प्रेगाबालिन’ दवा को शामिल करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। यह फैसला कुछ राज्यों से मिली उन रिपोर्टों को देखते हुए लिया गया है, जिनमें प्रेगाबालिन के गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग की बात सामने आई थी।

नियमों का उल्लंघन करने और उनका पालन नहीं करने पर ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मंत्रालय ने बताया कि यह दवा पुराने दर्द, न्यूरोपैथी, फाइब्रोमायल्जिया और कुछ विशेष न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के इलाज के लिए दी जाती है, लेकिन कथित तौर पर इसके नींद लाने वाले, उत्साह पैदा करने वाले और मानसिक प्रभावों के कारण इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

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मंत्रालय ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों, जिनमें निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और फार्मासिस्ट शामिल हैं, को सलाह दी जाती है कि वे इस अधिसूचना के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

देश के कुछ हिस्सों से अवैध रूप से जमा की गई और बिना अनुमति के बेची जा रही ‘प्रेगाबालिन’ की हाल में बरामदगी की खबरें भी सामने आई हैं।

‘गैजेट ऑफ इंडिया एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ में प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद ‘प्रेगाबालिन’ अब ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945’ के तहत मौजूदा ‘शेड्यूल एच’ के बजाय अधिक सख्त ‘शेड्यूल एच1’ प्रावधानों के तहत विनियमित की जाएगी।

‘शेड्यूल एच1’ के तहत दवा के पर्चे पर लिखी चेतावनी ‘दवा – सावधानी’ में कहा गया है कि इस दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना लेना खतरनाक है और इसे किसी पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (आरएमपी) के पर्चे के बिना खुदरा में नहीं बेचा जा सकता।

संशोधित वर्गीकरण के अनुसार, ‘प्रेगाबालिन’ केवल किसी पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (आरएमपी) द्वारा जारी वैध पर्चे के आधार पर ही बेची जा सकेगी। साथ ही, खुदरा विक्रेताओं को पर्चों और बिक्री का विवरण दर्ज करने के लिए अलग रजिस्टर रखना होगा और निर्माताओं को उत्पाद की पैकेजिंग पर निर्धारित ‘शेड्यूल एच1 ड्रग वार्निंग’ लेबल प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

मंत्रालय ने कहा, “इस कदम का उद्देश्य पूरी आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही को मजबूत करना, बिना अनुमति के पहुंच को रोकना, पर्चों की निगरानी को बेहतर बनाना, अवैध तस्करी पर रोक लगाना और दवाओं के गलत इस्तेमाल व दुरुपयोग से जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है।”

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