
माराकेच: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यहां कहा कि वर्तमान के चुनौतीपूर्ण समय में वसुधैव कुटुंबकम या ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की सच्ची भावना के साथ 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। श्रीमती सीतारमण ने यहां अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) विश्व बैंक की वार्षिक बैठक के इतर विकास समिति की 108वीं बैठक में विश्व बैंक के गवर्नर के रूप में भाग लिया। बैठक का एजेंडा था पृथ्वी पर गरीबी को समाप्त करना – विश्व बैंक के विकास पर गवर्नरों को रिपोर्ट।
श्रीमती सीतारमण ने हस्तक्षेप करते मोरक्को और लीबिया में भूकंप और बाढ़ के पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत मोरक्को और लीबिया के लोगों और अधिकारियों के साथ एकजुटता से खड़ा है क्योंकि वे इससे उबरने का प्रयास कर रहे हैं। इन आपदाओं का विनाशकारी प्रभाव होता है। एजेंडे पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विकासात्मक प्रभाव को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से ‘बेहतर, बड़ा और अधिक प्रभावी’ विश्व बैंक बनाने के जी20 देशों के सामान्य लक्ष्य की दिशा में प्रगति उत्साहजनक है। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि विश्व बैंक के विकास की दिशा बहुस्तरीय विकास बैंक (एमडीबी) पारिस्थितिकी तंत्र में खाका तैयार करेगी।”
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