Last Updated: September 23, 2026

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Reserve Bank of India के कदम का असर, रुपया डॉलर के मुकाबले 1% मजबूत

March 30, 2026

Reserve Bank of India के कदम का असर, रुपया डॉलर के मुकाबले 1% मजबूत

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नई पहल के बाद सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1.3 प्रतिशत मजबूत होकर 93.59 पर खुला।

दरअसल, आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए बैंकों को निर्देश दिया है कि वे रुपए में अपनी ओपन पोजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखें, जिसका मकसद रुपए में गिरावट को रोकना है।

केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों से कहा है कि वे दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर पोजिशन 100 मिलियन डॉलर तक ही रखें। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी कमर्शियल बैंक 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू कर दें। बाजार की स्थिति के अनुसार आरबीआई आगे चलकर अलग-अलग सीमाएं भी तय कर सकता है।

अनुमान के मुताबिक, इस तरह की ओपन पोजिशन का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर से ज्यादा तक है।

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मार्च में वैश्विक तनाव के कारण रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हुआ था। पिछले शुक्रवार को यह करीब 1 प्रतिशत गिरकर 94.8125 तक पहुंच गया था और 94.84 के स्तर को छू लिया था।

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें रुपए और पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है और इसमें और बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने, हूती विद्रोहियों के शामिल होने और अमेरिका द्वारा अतिरिक्त सैनिक भेजने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर बढ़कर करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी, जहां तेज ग्रोथ, कम महंगाई और स्थिर घाटा था, लेकिन अब स्थिति कमजोर हुई है। अब आने वाले समय में जीडीपी ग्रोथ कम होने, महंगाई बढ़ने और राजकोषीय व चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, बाजार ने इन जोखिमों को काफी हद तक पहले ही ध्यान में रख लिया है। निफ्टी का पी/ई रेशियो करीब 19.9 गुना पर आ गया है, जो फिलहाल ठीक माना जा रहा है, लेकिन अभी सस्ता नहीं कहा जा सकता।

विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई का यह कदम रुपए को नजदीकी समय में सपोर्ट दे सकता है। डॉलर की बड़ी पोजिशन कम होने से रुपया मजबूत हो सकता है।

फिलहाल डॉलर की मांग और तेल से जुड़ी महंगाई के खतरे रुपए पर दबाव बनाए हुए हैं। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आती, तब तक रुपए में कमजोरी बनी रह सकती है।

इस बीच, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.66 प्रतिशत तक बढ़कर 116.70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.75 प्रतिशत बढ़कर 103.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

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