Site icon Dainik Savera Times

Reserve Bank of India का फैसला, कैपिटल मार्केट नियमों की समयसीमा 1 जुलाई तक बढ़ी

RBI capital market rules deadline extended July 1 India

RBI capital market rules deadline extended July 1 India

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े अपने संशोधित नियमों को लागू करने की समयसीमा 3 महीने बढ़ा दी है। अब ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे, जबकि पहले इन्हें 1 अप्रैल से लागू किया जाना था।

यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी (सीएमआई) और इंडस्ट्री संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में ऑपरेशनल और समझ से जुड़ी चुनौतियों की बात कही थी।

आरबीआई ने इन नियमों का ड्राफ्ट 13 फरवरी 2026 को जारी किया था, जिसके बाद सार्वजनिक परामर्श भी किया गया था।

आरबीआई ने अधिग्रहण वित्तपोषण, वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ लोन और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर से जुड़े मामलों में भी कुछ स्पष्टता दी है।

ये भी पढ़ें : https://dainiksaveratimes.com/business/rural-development-fund-1500-crore-6-states-india/

नए नियमों के तहत अधिग्रहण फाइनेंस के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें मर्जर और अमलगमेशन (विलय) को भी शामिल किया गया है, जिससे पहले की अस्पष्टता दूर हो गई है। हालांकि, यह फाइनेंस केवल उन मामलों में दिया जाएगा जहां किसी गैर-वित्तीय कंपनी पर नियंत्रण हासिल करना उद्देश्य हो।

अगर लक्षित कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित लाभ (सिनर्जी) उसकी सभी सब्सिडियरी कंपनियों में भी दिखे, न कि सिर्फ मुख्य कंपनी में।

नए नियमों के तहत कंपनियों को अब अधिग्रहण फाइनेंस भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए लेने की अनुमति भी दी गई है।

वहीं, रीफाइनेंसिंग के नियमों को सख्त किया गया है। बैंक अब अधिग्रहण लोन का रीफाइनेंस तभी कर सकेंगे जब डील पूरी हो जाए और कंपनी पर नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही, यह पैसा सिर्फ पुराने अधिग्रहण लोन को चुकाने के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इसके अलावा, अगर अधिग्रहण फाइनेंस किसी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉर्पोरेट गारंटी जरूरी होगी, जिससे बैंकों की सुरक्षा मजबूत होगी।

इस फैसले से बैंकों को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के मुताबिक ढालने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। साथ ही, नए नियमों में स्पष्टता आने से कानूनी विवाद और जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

निवेश करने वाली कंपनियों के लिए यह ढांचा अधिग्रहण फाइनेंस के नए रास्ते खोलता है, लेकिन साथ ही नियंत्रण आधारित निवेश और सख्त रीफाइनेंसिंग नियमों के जरिए सीमाएं भी तय करता है।

कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी के लिए आरबीआई ने कुछ राहत भी दी है। अब बैंक 100 प्रतिशत नकद या नकद-जैसे कोलैटरल के बदले प्रोपरायटरी ट्रेडिंग के लिए फंडिंग दे सकेंगे। साथ ही, बाजार निर्माण गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली सिक्योरिटीज के खिलाफ फाइनेंसिंग पर लगी पाबंदियां भी हटा दी गई हैं।

Exit mobile version