Last Updated: September 21, 2026

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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Reserve Bank of India अपना रुख रख सकता है स्थिर

April 2, 2026

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Reserve Bank of India अपना रुख रख सकता है स्थिर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ती तेल की कीमतों के कारण यह फैसला लिया जा सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, अब ब्याज दरों में कटौती का दौर समाप्त हो चुका है और आरबीआई लंबे समय तक दरों को स्थिर रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल न्यूट्रल रुख अपनाएगा और बदलते हालात पर नजर रखेगा। साथ ही, तरलता और रुपए को सहारा देने के लिए कुछ खास कदम भी उठाए जा सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर महंगाई 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार करती है, तो साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी की जा सकती है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, “युद्ध का आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर असर अगले 3-4 महीनों में साफ होगा। इसके बाद आरबीआई अपनी ब्याज दरों की दिशा पर फैसला लेगा।”

पिछली नीति बैठक के बाद से अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

बाजारों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस युद्ध के कारण विदेशी निवेशकों (एफपीआई) का पैसा भारत से बाहर जा रहा है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस युद्ध का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों पर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा, इसलिए आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी और महंगाई के अपने अनुमान में बदलाव कर सकता है।

सीईए द्वारा हाल ही में जारी मासिक आर्थिक बुलेटिन में चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट-सीएडी) वित्त वर्ष 2027 में भी काफी बढ़ने की चेतावनी दी गई है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 7 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही बैंक ने चालू खाता घाटा बढ़ने की भी आशंका जताई है।

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