बिजनेस डेस्कः फरवरी से शुरू हुआ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब तक जारी है, जिसका असर कई पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल रहा है। भारत भी इस समय आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। लगातार गिरते रुपये ने सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की चिंता बढ़ा दी है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को देखते हुए अब RBI एक बार फिर अपने पुराने ‘मास्टर स्ट्रोक’ को अपनाने की तैयारी में है।
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RBI का पुराना मास्टर स्ट्रोक
दरअसल, रुपये की लगातार गिरती कीमत को संभालने के लिए RBI साल 2013 के आर्थिक संकट के दौरान अपनाई गई रणनीति को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है। इस बारे में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं। मीडिया से बातचीत में संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI करेंसी को स्थिर रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी, अतिरिक्त करेंसी स्वैप व्यवस्था और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे कदम शामिल हैं।
क्या है ‘टैपर टैंट्रम प्लेबुक’?
जब अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बाजार में नकदी डालना कम कर देता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते देशों से पैसा निकालने लगते हैं। इसका असर सीधे रुपये, शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। रुपये की कीमत गिरने लगती है, डॉलर महंगा हो जाता है और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसी ही स्थिति साल 2013 में बनी थी। तब RBI ने ‘टैपर टैंट्रम प्लेबुक’ रणनीति अपनाई थी। इसके तहत RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की थी, साथ ही ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की गई थी।
2013 में भी अपनाई गई थी यही रणनीति
बता दें साल 2013 में भी भारत आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था। उस समय RBI ने ‘टैपर टैंट्रम प्लेबुक’ के जरिए बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये को स्थिर करने की कोशिश की थी। अब एक बार फिर RBI इसी रणनीति को अपनाने की तैयारी में है, ताकि बाजार में डॉलर की कमी न हो और रुपये की गिरावट को रोका जा सके।
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