Last Updated: October 9, 2026

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आरबीआई इस साल सरकार को 2.8–3.3 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दे सकती है

May 22, 2026

आरबीआई इस साल सरकार को 2.8–3.3 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दे सकती है

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सेंट्रल बोर्ड शुक्रवार को संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत सरकार को सरप्लस फंड्स के ट्रांसफर को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस साल डिविडेंड पिछले वर्ष के 2.69 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड भुगतान को पार कर जाएगा।

बैंक ऑफ बड़ौदा और ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का अनुमान है कि डिविडेंड 2.8 लाख करोड़ रुपए से 3.3 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा।

गैर-कर राजस्व में होने वाली यह अप्रत्याशित वृद्धि सरकार के वित्त को मजबूत करेगी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार से अधिक ऋण लिए बिना राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने में सहायक होगी।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों और केंद्रीय बैंक से 3.16 लाख करोड़ रुपए डिविडेंड की उम्मीद जताई थी। पिछले साल, आरबीआई ने 2.68 लाख करोड़ रुपए डिविडेंड के रूप में सरकार को दिए थे। इसमें पिछले साल की अपेक्षा 27 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी।

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एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोरा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आरबीआई का डिविडेंड इस वर्ष 2.8 लाख करोड़ रुपए से 3.3 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा, जो पूंजी के उपयोग के स्तर पर निर्भर करेगा। उच्च ब्याज आय और संभावित रूप से कम बफर आवश्यकता के चलते पिछले वर्ष के 2.7 लाख करोड़ रुपए के डिविडेंड की तुलना में अधिक डिविडेंड देने में सहायक हो सकती है।”

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस का अनुमान है कि इस वर्ष डिविडेंड 3-3.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहेगा, जिसका मुख्य कारण कंटीजेंसी बफर आवश्यकता में कमी है। उन्होंने कहा कि 2025-26 के सरप्लस के कारक 2024-25 से भिन्न होंगे, जब विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग से अधिक आय के कारण आरबीआई के डिविडेंड में भारी वृद्धि हुई थी।

सबनाविस ने बताया, “पिछले वर्ष डिविडेंड 2.7 लाख करोड़ रुपए था, इसलिए इस वर्ष यह लगभग 50,000 करोड़ रुपए अधिक होगा। इस बार कंटीजेंसी बफर में कमी के कारण सरप्लस अधिक होगा।”

कंटीजेंसी बफर, उस फंड को कहा जाता है जो कि आरबीआई मौद्रिक नीति झटकों, क्रेडिट रिस्क और प्रतिभूतियों में मूल्यह्रास को कवर करने के लिए उपयोग करता है। इसका साइज आरबीआई की बैलेंसशीट में 4.5 से 7.5 प्रतिशत के बीच होता है।

 

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