
नई दिल्ली: विदेश में बसे भारतीयों द्वारा भारत में भेजा गया धन (रेमिटैंस) 2024 में 3.7 प्रतिशत बढ़कर 124 अरब डॉलर हुआ। 2025 में इसके 129 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई। भारत के धन प्रेषण का प्राथमिक स्नेत तेल निर्यातक देश हैं। विश्व बैंक के अनुसार, भारत की सबसे अधिक प्रवासी आबादी है और यह सबसे ज्याद धन प्रेषण प्राप्त करने वाला देश है। भारत में 2023 में 120 अरब अमरीकी डॉलर भेजे गए थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में सोमवार को पेश आíथक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में 2024 के लिए धन प्रेषण का परिदृशय़ मजबूत है। इसमें 3.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।’ इसमें कहा गया कि भारत की प्रवासी आबादी में अधिकतर उच्च आय वाले ओईसीडी बाजारों में कार्यरत उच्च कुशल श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा तथा जीसीसी बाजारों में कार्यरत कम कुशल प्रवासी शामिल हैं।
समीक्षा में कहा गया, ‘‘ संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर जैसे स्नेत देशों के साथ अपने एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) को जोड़ने के भारत के प्रयासों से लागत में कमी आने और धन प्रेषण में तेजी आने की उम्मीद है।’ धन प्रेषण में 2023 में वृद्धि मुख्य रूप से घटती मुद्रास्फीति और अमरीका तथा यूरोप में मजबूत श्रम बाजारों (भारत के कुशल प्रवासियों के लिए सबसे बड़े गंतव्य) और अन्य ओईसीडी गंतव्यों के साथ-साथ जीसीसी देशों में कुशल और कम-कुशल श्रमिकों की सकारात्मक मांग के कारण हुई। शुद्ध सेवा प्राप्तियां 2022-23 में 143.3 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 162.8 अरब डॉलर हो गईं।
इसकी मुख्य वजह सॉफ्टवेयर, यात्र तथा व्यावसायिक सेवाओं का बढ़ता निर्यात रहा। समीक्षा कहती है कि जब विदेशी मुद्रा के रूप में रुपए का मूल्य कम होता है, तो धन प्रेषकों को बेहतर मूल्य मिलता है, चाहे वह संयुक्त अरब अमीरात के दिरहम, अमरीकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड या किसी अन्य मुद्रा के रूप में हो।
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