नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आज वित्तीय प्रणाली की मजबूती भविष्य के खतरों से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क रहने पर जोर दिया। उन्होंने नीति निर्माताओं के लिए 5 प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता का लक्ष्य झटकों को रोकने पर नहीं, बल्कि वित्तीय प्रणाली को इस तरह मजबूत बनाने पर होना चाहिए कि वह इनके असर को झेल सके और उन्हें सीमित रख सके।
वित्तीय प्रणाली की मजबूती का जिक्र करते कहा, आज की मजबूती का मतलब कल की सुरक्षा नहीं हो सकता। हम आने वाली कमजोरियों को लेकर सतर्क रहने और अपनी वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आंतरिक या बाहरी वित्तीय झटकों को रोका नहीं जा सकता। ऐसे में हमारा मकसद एक ऐसी वित्तीय प्रणाली तैयार करना होना चाहिए जो भारी दबाव के बीच भी सेवाएं देने में सक्षम हो।
मल्होत्रा ने नई तरह के व्यवस्थागत जोखिमों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि किसी बैंक या वित्तीय क्षेत्र के भीतर से ही शुरू हो, बल्कि यह किसी वैश्विक घटना, साइबर हमले या तकनीकी विफलता से पैदा हो सकता है और कई रास्तों से वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। मल्होत्रा ने कहा कि मजबूती पूरे तंत्र के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि एक मजबूत बैंकिंग प्रणाली जरूरी तो है, लेकिन अकेले यही काफी नहीं है।

