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PNB बैंक में बड़ा घोटाला! ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये गायब, CBI ने दर्ज की FIR

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नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर 10.24 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार को दी गई।

सूत्रों की ओर से बताया गया कि बैंक की शुरुआती जांच में एक महिला कर्मचारी समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि बैंक में तैनात महिला कर्मचारी ने दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले और उन्हें अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कराया। यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीएनबी की शिकायत के मुताबिक, अब तक की शुरुआती जांच में अलग-अलग ग्राहकों के खातों से करीब 10.24 करोड़ रुपए की अनधिकृत निकासी की जानकारी मिली है। बैंक का कहना है कि यह रकम दीपांशी ने अशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर निकाली।

यह गड़बड़ी करीब तीन साल से चल रही थी। बैंक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के खातों से हुए सभी ट्रांजेक्शन का मिलान अभी किया जा रहा है। जांच के दौरान प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए धोखाधड़ी की कुल रकम में भी बदलाव संभव है।बैंक की शिकायत के साथ एफडी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की एक सूची भी दी गई है।

इसमें 49 एफडी का ब्योरा और उनके बंद होने के बाद ट्रांसफर की गई रकम दर्ज है। इस सूची में कुल 7023.77 लाख रुपए का आंकड़ा दर्ज है। हालांकि, यह आंकड़ा शिकायत में बताई गई 10.24 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी से अलग है। दोनों आंकड़ों का आपसी संबंध और पूरा हिसाब जांच का विषय है।

एफआईआर में बैंक कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य निजी व अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के साथ 43 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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