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Rupee vs Doller: रुपया शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ 85.58 प्रति डॉलर पर पहुंचा

Rupee Falls in Early Trade

Rupee Falls in Early Trade : मुंबई : बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया एक सीमित दायरे में कारोबार करता हुआ खुला, जिसमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आयातकों एवं विदेशी बैंकों द्वारा डॉलर की मजबूत मांग का असर दिखाई दिया। भारतीय रुपया आज सुबह 85.59 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। इसके बाद, रुपये ने 85.58 के उच्चतम और 85.67 के निचले स्तर को छुआ। बुधवार को रुपया 85.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिससे गुरुवार के शुरुआती कारोबार में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया।

रुपये में यह अस्थिरता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बाहरी मांग के चलते बनी हुई है। वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत थोड़ी बढ़ोतरी के साथ 64.93 डॉलर प्रति बैरल पर चल रही है, जो भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए एक चिंता का विषय बनी हुई है।

डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.06 प्रतिशत गिरावट के साथ 99.49 पर आ गया है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं की हलचल का संकेत देता है। हालांकि, भारतीय रुपया फिर भी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में ही बने रहने का संकेत दे रहा है।

Rupee Falls in Early Trade
Rupee Falls in Early Trade

शेयर बाजार में गिरावट, एफआईआई ने खरीदी की

शेयर बाजार की स्थिति भी दबाव में रही, जहां बीएसई सेंसेक्स 800.99 अंक की गिरावट के साथ 80,795.64 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 251.25 अंक गिरकर 24,562.20 अंक पर रहा। इस गिरावट के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सकारात्मक रहे और उन्होंने 2,201.79 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे बाजार में कुछ राहत आई।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। इस स्थिति में यदि कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि होती है, तो रुपये के मुकाबले डॉलर की कीमत और भी बढ़ सकती है। वहीं, अगर वैश्विक आर्थिक स्थितियां सामान्य रहती हैं, तो रुपये में कुछ स्थिरता आ सकती है।

निरंतर डॉलर की मांग पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की बढ़ती मांग मुख्यतः आयातकों की ओर से है, जो विदेशी व्यापार और कच्चे तेल के लिए भुगतान करने में अधिक डॉलर की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा, विदेशी बैंकों के भी डॉलर खरीदने की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे रुपये में दबाव बना हुआ है। समग्र रूप से, रुपये के मुकाबले डॉलर की स्थिरता और घरेलू बाजार की मौजूदा स्थिति पर भविष्य में तेल की कीमतों, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक घटनाओं का गहरा असर पड़ेगा।

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