
मुंबई: भारतीय मुद्रा रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 56 पैसे फिसलकर 86.08 प्रति डॉलर पर आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते आई है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 86.25 पर खुला, जो बाद में थोड़ा संभलकर 86.08 पर आ गया। यह गुरुवार के बंद भाव 85.52 के मुकाबले 56 पैसे की कमजोरी को दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा डीलरों के अनुसार, इज़राइल द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की खबरों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और निवेशक डॉलर की ओर भागते नजर आए। ब्रेंट क्रूड का दाम 8.59% बढ़कर 75.32 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे आयातक देशों पर दबाव और बढ़ा है।
डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को दर्शाता है, 0.31 प्रतिशत चढ़कर 98.22 पर पहुंच गया। इसने उभरते बाजारों की मुद्राओं, विशेषकर रुपये, पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
इसके अलावा, घरेलू शेयर बाजारों की कमजोर शुरुआत और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी रुपये की चाल को कमजोर किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को एफआईआई ने कुल 3,831.42 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिक्री की।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो निकट भविष्य में रुपये पर और दबाव बन सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की अगली प्रतिक्रिया और विदेशी निवेश की स्थिति इस गिरावट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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