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मध्य पूर्व तनाव के बीच रुपया टूटा, पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंचा

Rupee Slumps Amid Middle East Tensions

Rupee Slumps Amid Middle East Tensions

नई दिल्ली: भारतीय रुपया शुक्रवार को और कमजोर हो गया और पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर को पार कर गया। यह रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। शुक्रवार सुबह रुपया 92.89 प्रति डॉलर पर खुला और थोड़ी ही देर में गिरकर 93 के पार चला गया। यह लगातार गिरावट दिखाती है कि भारतीय मुद्रा पर इस समय भारी दबाव बना हुआ है।

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रुपये के गिरने की बड़ी वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण हैं, पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में तनाव। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशक सुरक्षित जगहों (जैसे डॉलर) की ओर जा रहे हैं, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर तक पहुंच गई थी। फिलहाल यह करीब 106 डॉलर के आसपास है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल महंगा होने पर रुपये पर दबाव बढ़ता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FPI Outflow)

1 मार्च से अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 80,000 करोड़ रुपये निकाले, यानी 8.5 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी। जब विदेशी पैसा बाहर जाता है, तो रुपये की मांग घटती है और वह कमजोर हो जाता है।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

मुद्रा विशेषज्ञ के.एन. डे के मुताबिक रुपया 93.15–93.16 के आसपास ट्रेड कर रहा है। पहले ही 93 का स्तर पार कर चुका है। बाजार में अभी भी बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है। उन्होंने कहा कि जब तक मध्य पूर्व का तनाव कम नहीं होता, रुपये पर दबाव बना रहेगा।

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आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार 93.20–93.40 के बीच रुपये को रुकावट (resistance) मिल सकती है। अगर गिरावट आती है, तो 92.70 पहला सपोर्ट स्तर है। इसके नीचे 92.50-92.40 अगला सपोर्ट हो सकता है।

RBI की भूमिका

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बीच-बीच में बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है ताकिरुपये की गिरावट बहुत तेज न हो लेकिन अभी यह गिरावट को पूरी तरह रोक नहीं पा रहा है। रुपये की यह गिरावट बताती है कि वैश्विक तनाव, महंगा तेल और विदेशी पूंजी का बाहर जाना इन सबका मिलाजुला असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अगर मध्य पूर्व का तनाव कम होता है, तभी रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।

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