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टैक्स बदलाव के बाद बायबैक नियमों में बदलाव, SEBI ने दिया नया प्रस्ताव

SEBI buyback rules proposal tax changes India share buyback update

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को एक्सचेंज के जरिए ओपन मार्केट बायबैक वापस शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसकी वजह हाल ही में टैक्स में हुए बदलाव को माना जा रहा है।

कंसल्टेशन पेपर में बाजार नियामक ने यह सुझाव दिया कि मौजूदा बायबैक नियमों के तहत एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में कंपनियों को एक बार फिर ओपन मार्केट से सीधे अपने शेयर वापस खरीदने की अनुमति दी जानी चाहिए।

टैक्स संबंधी चिंताओं के कारण इस पद्धति को पहले बंद कर दिया गया था।

सेबी ने कहा कि आयकर अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधनों से टैक्सेशन में पहले मौजूद असंतुलन दूर हो गया है।

संशोधित नियमों के तहत, बायबैक से शेयरधारकों को प्राप्त राशि को कैपिटल गेन माना जाएगा और उसी के मुताबिक, टैक्स लगाया जाएगा।

इससे बायबैक पर टैक्स का निर्धारण नियमित शेयर बाजार लेनदेन के समान हो जाता है और यह सभी निवेशकों के लिए न्यायसंगत हो जाता है।

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नियामक ने कहा कि कंपनियों से शेयरधारकों पर टैक्स का बोझ स्थानांतरित करने से खुले बाजार में शेयर बेचना स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बायबैक में भाग लेने के समान हो गया है।

इसमें आगे कहा गया कि यह पद्धति वैश्विक बाजारों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है क्योंकि यह निरंतर मूल्य निर्धारण में सहायक होती है और तरलता में सुधार करती है।

सेबी ने यह भी कहा कि खुले बाजार में बायबैक को पुनः शुरू करने से कंपनियों को अपनी पूंजी के प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा, साथ ही टैक्स के दृष्टिकोण से सार्वजनिक शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होगा।

हालांकि, इसमें यह भी जोड़ा गया कि यह कदम उचित नियमों और अनुपालन तंत्रों के अधीन होगा।

यह प्रस्ताव फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया जैसे उद्योग निकायों द्वारा नियामक के समक्ष इस मुद्दे को उठाने के बाद आया है।

इन संगठनों का तर्क है कि खुले बाजार में शेयर बायबैक अधिक कुशल हैं और विश्व स्तर पर इनका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जिससे कंपनियों को अपने शेयर मूल्यों को स्थिर करने में मदद मिलती है।

यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह कदम भारत के पूंजी बाजार नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जिससे कंपनियों को शेयरधारकों को नकदी लौटाने का एक और रास्ता मिलेगा और साथ ही समग्र बाजार दक्षता में भी सुधार होगा।

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