Last Updated: September 25, 2026

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शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 2800 अंक ऊपर; जानिए वजह

April 8, 2026

शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 2800 अंक ऊपर; जानिए वजह

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 4 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स लगभग 2,800 अंकों से ज्यादा चढ़कर 77,456.11 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया, वहीं निफ्टी 50 भी 800 अंकों से ज्यादा उछलकर 23,961.25 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी का असर पूरे बाजार में देखने को मिला, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 4 प्रतिशत तक की मजबूती आई।

बाजार की इस तेज रफ्तार का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 429 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 444 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को कुछ ही समय में करीब 15 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ। वहीं, बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स 19 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 20 के नीचे आ गया, जो बाजार में डर कम होने का संकेत देता है।

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इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा रही। डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका अगले दो हफ्तों तक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक देगा, जबकि ईरान ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच शुक्रवार को बातचीत शुरू होने की खबर से निवेशकों में उम्मीद जगी है कि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भी बाजार को मजबूती दी। ब्रेंट क्रूड करीब 14 प्रतिशत टूटकर 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई पर दबाव कम होने और आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते महंगाई के जोखिम कम होने की संभावना है।

इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि भारतीय रुपया मजबूत हुआ। मजबूत रुपए और कमजोर डॉलर से विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार की ओर सकारात्मक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं।

ग्लोबल संकेत भी सकारात्मक रहे। अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद एशियाई बाजारों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में 6 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

वहीं, बाजार की उम्मीदों के अनुरूप भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है और ‘न्यूट्रल’ रुख अपनाया है।

यह निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा और छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने दो दिनों की चर्चा के बाद सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दी। आरबीआई के इस फैसले का उद्देश्य मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।

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