Last Updated: October 8, 2026

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गांवों और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंचाएगा Starlink, एलन मस्क ने गिनाए फायदे

August 21, 2026

गांवों और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंचाएगा Starlink, एलन मस्क ने गिनाए फायदे

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि स्टारलिंक की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा भारत में सबसे कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी का इंतजार कर रही है।

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवाएं प्राप्त क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मदद करेगा।” मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट पहुंच का अंतर अभी भी बना हुआ है। एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में अभी भी चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा (4जी) उपलब्ध नहीं थी। यह दर्शाता है कि देश के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक पारंपरिक दूरसंचार ढांचा अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में कुल 109.3 करोड़ इंटरनेट सब्सक्रिप्शन्स थीं, जिनमें से 44.08 करोड़ सब्सक्रिप्शन्स ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन घनत्व केवल प्रति 100 लोगों पर 48.31 था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 प्रति 100 लोगों तक पहुंच चुका था। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल पहुंच के मामले में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। इसी संदर्भ में पोस्ट में कहा गया कि भारत सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत 8.5 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया जा चुका है और लगभग 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवाओं के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद जून 2026 तक केवल 80,472 ग्राम पंचायत उपस्थिति केंद्र ही पूरी तरह परिचालन में थे।

पोस्ट में आगे कहा गया है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं जहां पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना कठिन और महंगा है। इनमें दूरस्थ गांव, पर्वतीय क्षेत्र, द्वीपीय इलाके और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने से पहले नियामकीय मंजूरियां, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां पूरी की जानी चाहिए। कंपनी लंबे समय से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही है।

स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा है, जो निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित हजारों उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक उच्च-गति इंटरनेट पहुंचाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं सीमित या अनुपलब्ध हैं। इससे पहले अगस्त में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि एलन मस्क की कंपनी एक्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नए नियम का पालन करना होगा, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक सरकार द्वारा सामग्री हटाने के अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा, एलन मस्क ने दावा किया है कि एक्स में शामिल एक नए एल्गोरदम का खुलासा करने के बाद ‘सरकारों द्वारा आवश्यक कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है’।

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