Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 170 अंकों की गिरावट के साथ 23,700 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ सकती है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी टैरिफ से निर्यात क्षेत्र पर दबाव
अमेरिका ने श्रम संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले से भारतीय निर्यात आधारित कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका का कहना है कि वह ऐसे उत्पादों के आयात को सीमित करना चाहता है जिनके निर्माण में श्रम मानकों और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। इस कदम से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव
केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजारों में भी बिकवाली का माहौल देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 3 प्रतिशत तक फिसल गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 3.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।
हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया, वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट भी मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करता रहा। निवेशकों के बीच बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं ने पूरे क्षेत्रीय बाजार पर दबाव बनाया।
वॉल स्ट्रीट में भी बिकवाली का असर
अमेरिकी शेयर बाजार में भी गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज बिकवाली के चलते नैस्डैक, डाऊ जोन्स और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए।
Alphabet के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। हालांकि कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ते निवेश को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई। दूसरी ओर Tesla के शेयरों में भी दोहरे अंक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे अमेरिकी टेक सेक्टर में भारी दबाव देखने को मिला।
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निवेशकों के लिए आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। साथ ही अमेरिकी व्यापार नीतियों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति और मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है.
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