Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार ने आज कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद सकारात्मक शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांक हरे निशान में रहे और निवेशकों का भरोसा बढ़ता नजर आया।
सुबह के कारोबार में बीएसई का BSE Sensex लगभग 372 अंक यानी करीब 0.50% की बढ़त के साथ 74,291 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 91 अंक चढ़कर 23,333 के आसपास कारोबार करता दिखा।
चौतरफा खरीदारी, लेकिन मेटल सेक्टर में कमजोरी
बाजार में कुल मिलाकर खरीदारी का माहौल रहा। एनएसई पर करीब 1,456 शेयरों में तेजी देखी गई, जबकि 823 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मेटल सेक्टर ने बाजार की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया, जहां दबाव साफ नजर आया।
विशेष रूप से मेटल इंडेक्स में लगभग 1% की गिरावट देखने को मिली। इस सेक्टर में भारी दबाव के चलते कई बड़े शेयर लाल निशान में आ गए।

इन दिग्गज शेयरों ने बाजार को संभाला
फूड, एफएमसीजी और कंजम्प्शन सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की खरीदारी खास तौर पर कुछ बड़ी कंपनियों में देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज़, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, नेस्ले इंडिया, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़ इन शेयरों में मजबूत खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली और बाजार का सेंटीमेंट सकारात्मक बना रहा।
मेटल और आईटी शेयरों में दबाव
वहीं दूसरी ओर, मुनाफावसूली के चलते कुछ बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली। मेटल सेक्टर के प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही, जिनमें हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़, हिंदुस्तान जिंक, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड शामिल हैं।
इसके अलावा आईटी और कुछ वित्तीय शेयरों में भी हल्की गिरावट देखी गई, जिनमें इंफोसिस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे।
रुपये पर भी दिखा दबाव
मुद्रा बाजार में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर 95.54 के स्तर पर खुला। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।
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कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक
हालांकि सेक्टरवार उतार-चढ़ाव जारी रहा, लेकिन FMCG और कंजम्प्शन शेयरों की मजबूती ने बाजार को संतुलन दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह चुनिंदा बड़ी कंपनियों में खरीदारी बनी रही तो बाजार में निकट अवधि में स्थिरता बनी रह सकती है।