नई दिल्ली: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली हावी रही, जिससे प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:29 बजे बीएसई सेंसेक्स 373 अंकों से ज्यादा टूटकर 84,849 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 126 अंकों की गिरावट के साथ 25,930 के आसपास फिसल गया।
सेक्टोरल प्रदर्शन और शेयरों की चाल
शुरुआती सत्र में निफ्टी पर श्रीराम फाइनेंस और ICICI बैंक में हल्की मजबूती देखने को मिली, जबकि ट्रेंट, डॉ. रेड्डीज़ लैब्स, NTPC, ONGC और मैक्स हेल्थकेयर जैसे शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा।
सेंसेक्स की बात करें तो महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, ट्रेंट, NTPC, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा स्टील ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे टूटकर 90.58 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार जानकारों के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 90.53 पर खुला और जल्द ही 90.58 तक फिसल गया। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 17 पैसे गिरकर 90.49 पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का सबसे निचला स्तर था। निवेशक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाए हुए हैं।
एशियाई बाजारों से कमजोर संकेत
वैश्विक स्तर पर भी संकेत सकारात्मक नहीं रहे। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, खासकर जापान और दक्षिण कोरिया के बाजार दबाव में रहे। निवेशक चीन और अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों से पहले सतर्कता बरत रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जबकि नैस्डैक फ्यूचर्स टेक शेयरों में दबाव का संकेत दे रहे हैं।
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कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त
कमोडिटी बाजार में WTI क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली तेजी देखने को मिली। TradingEconomics के अनुसार, WTI क्रूड फ्यूचर्स बढ़कर करीब 57.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। हालांकि, सप्लाई ज्यादा रहने की आशंका के कारण कीमतें अब भी लगभग दो महीने के निचले स्तर के आसपास बनी हुई हैं। निवेशकों की नजर यूक्रेन से जुड़ी शांति वार्ताओं के घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है।