नई दिल्ली: हफ्ते के बीच कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर कमजोरी के साथ शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के चलते बुधवार को बाजार में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती सत्र में ही 146.86 अंक की गिरावट के साथ 81,955.24 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 40.75 अंक टूटकर 25,128.75 पर कारोबार करता नजर आया। लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में देखे गए, जिससे यह साफ है कि गिरावट व्यापक स्तर पर फैली है।
कुछ शेयरों ने दिखाई मजबूती, बाकी पर भारी दबाव
गिरावट के इस माहौल में भी कुछ चुनिंदा शेयरों ने मजबूती दिखाई। ट्रेंट, एसबीआई, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी और ओएनजीसी जैसे दिग्गज शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की और हरे निशान में ट्रेड करते रहे।
वहीं दूसरी ओर, हीरो मोटोकॉर्प, टाइटन, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली हावी रही, जिससे निफ्टी पर नकारात्मक असर पड़ा।

रुपया गिरा, डॉलर के मुकाबले बना रिकॉर्ड के करीब
बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह रही रुपया। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे टूटकर 88.80 प्रति डॉलर पर आ गया। यह इसका अब तक का लगभग सबसे निचला स्तर है।
विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी, अमेरिकी टैरिफ में संभावित वृद्धि और H-1B वीजा शुल्क बढ़ने की खबरों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया एक समय पर 88.71 तक भी पहुंच गया था।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गिरावट में घबराने की जगह निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और लंबी अवधि के लिए मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में निवेश का अवसर तलाशना चाहिए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया, जिससे यह साफ है कि बाजार की कमजोरी व्यापक है।