नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबारी हफ्ते के चौथे दिन कमजोरी के संकेत देखने को मिले। वैश्विक बाजारों से मिले मिलेजुले संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स ने करीब 184 अंकों की गिरावट के साथ 81,531.28 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की, वहीं निफ्टी 51 अंक फिसलकर 25,005.70 के आसपास पहुंच गया।
सुबह के शुरुआती सौदों में लगभग बराबरी पर ट्रेडिंग होती दिखी 1182 शेयरों में तेजी और 1186 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 151 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इस दौरान बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात करें तो ऑटो सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। खासकर टेलीकॉम, पॉवर, मेटल और कैपिटल गुड्स में करीब 0.5% तक की तेजी देखने को मिली।
इन शेयरों में दिखा दम, ये रहे दबाव में
निफ्टी के टॉप गेनर्स में हिंडाल्को, डॉ रेड्डीज लैब्स, ओएनजीसी, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई। दूसरी ओर, टाटा मोटर्स, बजाज फाइनेंस, टाइटन, मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसे दिग्गज स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली।
सेंसेक्स की बात करें तो भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, भारती एयरटेल, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, अदानी पोर्ट्स और इंफोसिस ने अच्छे प्रदर्शन के दम पर बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। इसके विपरीत, टाटा मोटर्स, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों पर बिकवाली का दबाव नजर आया।

चार दिनों में सेंसेक्स 1,298 अंक टूटा
पिछले चार ट्रेडिंग सेशनों में बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। इस दौरान सेंसेक्स करीब 1,298 अंक और निफ्टी लगभग 367 अंक कमजोर हुआ है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की तरफ से बुधवार को 2,425.75 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की गई, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई।
FIIs की बिकवाली बनी बड़ी चुनौती
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख प्रशांत तापसे ने बाजार की कमजोरी का कारण बताते हुए कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित उच्च टैरिफ और H-1B वीजा के लिए $1,00,000 का नया शुल्क जैसे फैसलों से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसके चलते निफ्टी को 25,300 के स्तर पर कड़ा प्रतिरोध मिल रहा है।
वहीं, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, इस साल अब तक बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रहा है। हालांकि, भारत में जारी आर्थिक सुधार, स्थिर ब्याज दर और मजबूत कॉर्पोरेट आय के चलते उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में FIIs भारतीय बाजार में दोबारा लौट सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है आगे की रणनीति?
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सतर्क रुख अपनाना जरूरी है। निवेशकों को बेहतर क्वालिटी वाले शेयरों में गिरावट का फायदा उठाकर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।