
नई दिल्ली : आयकर विभाग ने कम या बिल्कुल कारोबार नहीं दिखाने वाली इकाइयों, उनके पीछे मौजूद लोगों और कर निर्धारण प्रमाणपत्र जारी करने वाले चार्टर्ड अकाऊंटैंट के विदेश भेजी गई संदिग्ध राशि की जांच के लिए अभियान शुरू किया है। विभाग ने कहा कि इस अभियान के दायरे में भारत की जमीनी सीमाओं से लगे जिलों में स्थित ऐसी इकाइयों को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने बड़ी मात्रा में पैसा विदेश भेजा है। आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पर लिखा कि इस अभियान में करीब 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों को शामिल किया गया है।
इनमें सीमावर्ती राज्यों में स्थित 117 इकाइयां शामिल हैं। विभाग ने 18 अगस्त को संदिग्ध रूप से विदेश भेजी राशि की विस्तृत राष्ट्रव्यापी जांच शुरू की। इसमें मुखौटा कंपनियों, उनके पीछे मौजूद लोगों और फॉर्म 15सीबी प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों पर गौर किया गया है। संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण की जांच आंकड़ों के विश्लेषण और जमीनी स्तर से मिली सूचनाओं के बाद शुरू की गई है। इनसे पता चला कि कम या बिल्कुल कारोबार नहीं दिखाने वाली कुछ इकाइयों ने काफी पैसा विदेश भेजा।
विभाग ने चार्टर्ड अकाऊंटेंट को फॉर्म 15सीबी/फॉर्म 146 जारी करते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी और उचित जांच-पड़ताल तथा पेशेवर निर्णय लेने को कहा। आयकर विभाग ने कहा, प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उन्हें संबंधित लेनदेन और उससे जुड़े तथ्यों की उचित जांच करनी चाहिए, क्योंकि ये प्रमाणपत्र व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वित्त वर्ष में 5 लाख रुपए से अधिक के कर योग्य भुगतान किसी प्रवासी या विदेशी कंपनी को किए जाने पर यह जरूरी होता है।
आयकर विभाग ने कहा कि जमीनी स्तर से मिली सूचनाओं और विदेश भेजे गए पैसे के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर उसने ऐसी कई संदिग्ध इकाइयों की पहचान की है, जिन्होंने पिछले 3 वर्षों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजी। शुरुआती जांच में सामने आया कि धन विदेश भेजने वाली ये इकाइयां या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करती थीं या बहुत कम कारोबार दिखाते हुए रिटर्न दाखिल करती थीं। उनका घोषित कारोबार विदेश भेजी गई बड़ी रकम से मेल नहीं खाता था।