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पेट्रोल पर टैक्स राहत का हुआ ऐलान,देशभर के वाहन चालकों को मिलेगी राहत

Premium Petrol-Diesel Price Hike

Premium Petrol-Diesel Price Hike

नई दिल्ली: देश में वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को समाप्त करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहन देना और किसानों की आय बढ़ाना है।

बढ़ेगी एथेनॉल आधारित ईंधन की मांग

सरकार के इस फैसले के बाद उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की कीमतों में कमी आने की संभावना है। इससे ऐसे ईंधनों की मांग बढ़ सकती है, जिसका सीधा फायदा वाहन चालकों को मिलेगा। साथ ही एथेनॉल उत्पादन से जुड़े किसानों और उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। बता दें E85 फ्यूल E20 से 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता है।

किसानों के लिए भी खुशखबरी

एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अतिरिक्त या खराब गुणवत्ता वाले अनाज से किया जाता है। एथेनॉल की मांग बढ़ने से इन फसलों की खपत में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और आय मिलने की उम्मीद है।

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच बड़ा कदम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में भारत सरकार लंबे समय से जैव ईंधन और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

क्या होती है एक्साइज ड्यूटी?

एक्साइज ड्यूटी या उत्पाद शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है, जो देश के भीतर निर्मित या उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाता है। पेट्रोलियम उत्पाद, तंबाकू और शराब जैसी वस्तुएं आमतौर पर इस कर के दायरे में आती हैं।

किन ईंधनों पर मिलेगी छूट?

सरकार के नए प्रावधान के अनुसार 22%, 25%, 27% और 30% एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर अब एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। हालांकि यह छूट केवल उन उत्पादों पर लागू होगी जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हों।

E20 और E85 में क्या है अंतर?

भारत में फिलहाल E20 पेट्रोल को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। वहीं E85 ईंधन में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है। अधिक एथेनॉल मिश्रण के कारण E85 को अपेक्षाकृत सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

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उपभोक्ताओं को कितना होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्साइज ड्यूटी हटने और एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से ईंधन की लागत में कमी आ सकती है। हालांकि वास्तविक लाभ राज्य करों, परिवहन लागत और बाजार स्थितियों पर भी निर्भर करेगा। आने वाले समय में यदि एथेनॉल आधारित ईंधनों का उपयोग बढ़ता है, तो वाहन चालकों को पेट्रोल खर्च में राहत मिल सकती है।

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