मुंबई: भारत की दिग्गज IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में एक बार फिर से कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। बता दें कि कंपनी की ताज़ा तिमाही रिपोर्ट (जून-सितंबर 2025) के अनुसार, TCS का कुल हेडकाउंट 19,755 कर्मचारियों की कमी के साथ घटकर 5,93,314 पर पहुंच गया है। यह गिरावट कंपनी द्वारा पहले से घोषित टारगेट से काफी अधिक (लगभग 66%) है, जिससे कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
TCS ने क्यों घटाई हेडकाउंट?
TCS के नए मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (CHRO), सुधीप कुनुमल, ने बयान देते हुए कहा कि यह गिरावट केवल छंटनी का परिणाम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया, जबकि कुछ को परफॉर्मेंस या बिजनेस स्ट्रक्चर के चलते निकाला गया। कुनुमल ने माना कि करीब 6,000 कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें कंपनी की ओर से हटाया गया है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रक्रिया अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में कुछ और बदलाव हो सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यह कदम भविष्य की बिजनेस रणनीति और प्रतिस्पर्धा में बने रहने की तैयारी का हिस्सा है।
NITES का आरोप: छंटनी को कम करके दिखा रही है कंपनी
आईटी कर्मचारियों के हक में काम करने वाले संगठन NITES (Nascent Information Technology Employees Senate) ने TCS पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि कंपनी छंटनी की वास्तविक संख्या को जानबूझकर कम करके पेश कर रही है।
NITES के मुताबिक, कंपनी की वेबसाइट और आंतरिक रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि लगभग 8000 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई थी। यह कर्मचारियों और पॉलिसी मेकर्स को गुमराह करने की कोशिश है।
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“छंटनी से फायदा सिर्फ कंपनी को, नुकसान कर्मचारियों का” – NITES
NITES ने आगे दावा किया कि TCS का बिजनेस लगातार बढ़ रहा है, और ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकालना मुनाफा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, न कि कोई ज़रूरी कॉर्पोरेट बदलाव। संगठन ने आरोप लगाया कि मैनेजमेंट की ओर से खुद ही ज़्यादातर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जबकि कंपनी की एट्रिशन रेट में गिरावट दर्ज हो रही है।
कर्मचारियों के लिए सेवरेंस और सपोर्ट का दावा
TCS ने इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उन्हें उचित सेवरेंस पैकेज, काउंसलिंग, और नई नौकरी खोजने में सहायता प्रदान की जा रही है। CHRO ने कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों की भलाई का पूरा ध्यान रख रही है और सभी फैसले लंबे समय की योजना को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं।
IT सेक्टर में नई चुनौती
TCS की इस छंटनी ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत का IT सेक्टर अब भी उतना ही स्थिर और भरोसेमंद है, जितना पहले था? मिड और सीनियर लेवल पर काम कर रहे अनुभवी कर्मचारियों को अचानक बाहर किया जाना, इंडस्ट्री के भीतर अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना को जन्म दे रहा है।
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