नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। वेिषकों ने कहा कि इसके अलावा अमरीकी फैडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि यह सप्ताह घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आंकड़ों से भरा है। उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को प्रभावित कर सकता है।
घरेलू मोर्चे पर, बाजार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख व्यापक आíथक संकेतकों पर नजर रखेंगे। पिछले सप्ताह बीएसई सैंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि होमरुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध वैश्विक कच्चे तेल आपूíत को सख्त बना सकता है, जिससे एशिया में मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैं।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाले सप्ताह में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर असर पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू शेयरों से लगभग 52,704 करोड़ रुपए निकाले हैं। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव, रुपए की कमजोरी और भारतीय वृद्धि दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का प्रभाव है।
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