प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में करीब 18,509 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई।
इन प्रोजेक्ट्स में कसारा–मनमाड, दिल्ली–अंबाला और बल्लारी–होसपेटे सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन जोड़ने का काम शामिल है। इससे रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों व माल ढुलाई दोनों में सुधार आएगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता और सेवा की विश्वसनीयता मजबूत होगी, साथ ही भीड़भाड़ भी कम होगी।
इन परियोजनाओं से दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों को फायदा मिलेगा। करीब 389 किलोमीटर तक रेलवे नेटवर्क बढ़ेगा, जिससे 3,902 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 97 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
ये प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं, जिसका मकसद मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत करना है। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही और आसान होगी।
रेल लाइन क्षमता बढ़ने से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी, जिनमें भावली बांध, श्री घाटंदेवी मंदिर, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री माता वैष्णो देवी, हम्पी, बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बियर अभयारण्य, तुंगभद्रा बांध और विजया विट्टला मंदिर जैसे स्थल शामिल हैं।
इन परियोजनाओं से कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की ढुलाई आसान होगी। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 96 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी। साथ ही यह प्रोजेक्ट तेल आयात में करीब 22 करोड़ लीटर की कमी और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 111 करोड़ किलोग्राम की कमी लाने में मदद करेगा, जो करीब 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है।
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