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मेट्रो कॉरिडोर के साथ विकास को मिलेगी नई दिशा, TOD नियम 2026 पर Manohar Lal Khattar का जोर

TOD rules 2026 metro corridor development Manohar Lal Khattar urban growth India

TOD rules 2026 metro corridor development Manohar Lal Khattar urban growth India

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को कहा कि पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) और शुल्क संबंधी विनियम, 2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासन से संबंधित शहरी विकास को बढ़ावा देंगे और इससे पहुंच में सुधार हो और बड़े पैमाने पर सस्ते आवासों का निर्माण संभव होगा।

पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) और शुल्क संबंधी विनियम, 2026 की अधिसूचना जारी करने के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से ये परिवर्तनकारी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण का साक्षी बन रही है जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

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पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) की अवधारणा की परिकल्पना दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में पहले ही की जा चुकी है।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के मुताबिक, वर्तमान नीति में कॉरिडोर आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है और इससे 207 वर्ग किलोमीटर (मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के 500 मीटर के दायरे) का क्षेत्र मुख्य रूप से योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए खुलेगा।

इस 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से लगभग 80 वर्ग किलोमीटर का वह क्षेत्र जो भूमि पूलिंग, कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र और अनधिकृत कॉलोनियों के अंतर्गत आता है जिसे पिछली टीओडी नीति में शामिल नहीं किया गया था, उसे अब नई टीओडी नीति के दायरे में लाया गया है।

इस नीति में लचीलापन है जिससे चालू तथा प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर/आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के साथ-साथ टीओडी विकास हो सकता है। इससे टीओडी विकास नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के अनुरूप हो सकेगा। ऐसे क्षेत्रों में नए सस्ते आवास और उनसे संबंधित बुनियादी ढांचे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए जा सकेंगे। इससे मेट्रो के यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी और उनका बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित होगा।

सरकार के मुताबिक, इस नीति से टीओडी प्रावधानों के अंतर्गत 2000 वर्ग मीटर के छोटे आकार के भूखंडों का विकास संभव होगा।

2000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के भूखंडों पर 18 मीटर चौड़ी सड़क के साथ टीओडी क्षेत्र में अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक के एफएआर की स्वीकृति है। इसमें से स्वीकृति योग्य कुल एफएआर का 65 प्रतिशत अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है जिसमें 100 वर्ग मीटर (≤ 99 वर्ग मीटर) के निर्मित क्षेत्र वाली आवासीय इकाइयां शामिल हैं ताकि मेट्रो कॉरिडोर के साथ सस्ते आवास उपलब्ध हो सकें।

सरकार के मुताबिक, इस नीति के तहत टीओडी शुल्कों को सरल बनाया गया है और एक ही टीओडी शुल्क प्रस्तावित किया गया है (जिसमें डीजेबी के जल और सीवरेज शुल्क, एमसीडी के स्वीकृत शुल्क, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क और पट्टे से मुक्त स्वामित्व में रूपांतरण के लिए लगाए गए शुल्क/अतिरिक्त शुल्क/अतिरिक्त एफएआर सहित शुल्क और डीडीए शुल्क शामिल हैं)।

 

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