Site icon Dainik Savera Times

ट्रेड समझौते में डेयरी सेक्टर शामिल नहीं, कई भारतीय उत्पादों को जीरो ड्यूटी का लाभ: पीयूष गोयल

India trade agreement zero duty products

India trade agreement zero duty products

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आने के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत ने इस समझौते से डेयरी सेक्टर को बाहर रखा है और शर्तों के साथ भी कोई अनुमति अमेरिका को नहीं दी गई है।

वाणिज्य भवन में पत्रकारों से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा,”भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी सेक्टर में किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है। साथ ही, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी जैसे फल, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु आहार उत्पाद और तंबाकू पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।”

सेब और कपास के आयात पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में इन उत्पादों की खपत, उत्पादन के मुकाबले काफी अधिक है। इस कारण से पहले से ही इन उत्पादों का आयात होता आया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में करीब 6 लाख टन सेब का आयात होता है। मौजूदा समय में आयात का बेस प्राइस 50 रुपए है और इस पर 50 प्रतिशत टैरिफ है, जिससे घरेलू बाजार में आयातित सेब की कीमत 75 रुपए होती है।

उन्होंने आगे बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आयातित सेब का बेस प्राइस 80 रुपए रखा गया है। वहीं, टैरिफ 25 प्रतिशत है, जिससे आयातित सेब की कीमत 100 रुपए हो जाती है। इसके साथ ही, आयात के लिए एक कोटा भी निर्धारित किया गया है। ऐसे में घरेलू किसानों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास के साथ भी ऐसा ही है। भारत में कुछ विशेष प्रकार की कपास का हमेशा से आयात होता आया है। इस कारण किसानों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार लगातार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है। इस व्यापार समझौते के तहत कई कृषि उत्पादों जैसे मसालों, चाय, कॉफी और उससे जुड़े उत्पाद, नारियल और नारियल तेल, काजू और अन्य उत्पादों का जीरो ड्यूटी पर अमेरिका को निर्यात होगा।

इसके अलावा, रत्न और आभूषण, फार्मा उत्पादों और स्मार्टफोन के निर्यात पर भी जीरो ड्यूटी लगेगी।

गोयल ने आगे कहा कि भारत-अमेरिका का लक्ष्य आपसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इससे आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यातकों के लिए काफी सारे नए अवसर खुलेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे देश को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी।

 

Exit mobile version