नई दिल्ली: नकद लेनदेन को पीछे छोड़ते हुए यूपीआई भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन गया है, हालांकि गांवों तथा छोटे कस्बों में रुपे डेबिट कार्ड के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। वित्त मंत्रलय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने 13-14 फरवरी 2026 को आयोजित चिंतन शिविर के दौरान रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना का सामाजिक-आíथक प्रभाव वेिषण शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।
सामाजिक-आíथक प्रभाव का वेिषण 15 राज्यों के 10,378 प्रतिभागियों को शामिल करते किए एक व्यापक प्राथमिक सव्रेक्षण पर आधारित है। इसमें 6,167 उपयोगकर्ता, 2,199 व्यापारी और 2,012 सेवा प्रदाता शामिल हैं, जो भारत के डिजिटल भुगतान परिवेश से जुड़े पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सव्रेक्षण में शामिल प्रतिभागियों में यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) सबसे पसंदीदा लेनदेन माध्यम बनकर उभरा है। 57 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे लेनदेन में यूपीआई का उपयोग करते हैं।
यह नकद लेनदेन (38 प्रतिशत) से कहीं अधिक है। इसका मुख्य कारण उपयोग में आसानी और तुरंत धन हस्तांतरण की सुविधा है। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान का अब दैनिक लेनदेन व्यवहार पर दबदबा है। 65 प्रतिशत यूपीआई उपयोगकर्ता प्रतिदिन कई डिजिटल लेनदेन करते हैं। वित्त मंत्रलय ने कहा कि रिपोर्ट में छोटे कारोबारियों को डिजिटल लेन-देन को लेकर सशक्त बनाने, यूपीआई लाइट जैसे समाधान के माध्यम से कम मूल्य के लेनदेन को बढ़ावा देने और संपर्क, डिजिटल साक्षरता तथा धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में निरंतर निवेश की सिफारिशें की गई हैं।
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