नई दिल्ली: अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15% के एकसमान शुल्क का एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुछ अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है जिन्हें पहले अधिक ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ा है। इनमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकतर देश शामिल हैं। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान (चीन) जैसे देशों पर इसका प्रभाव हालांकि सीमित होगा जहां शुल्क पहले से ही 15 प्रतिशत है।
बयान में कहा गया है, काफी अनिश्चितता है, लेकिन हम कुछ बातें जानते हैं। 15% का समान शुल्क उन एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, जिन्हें कहीं अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा है। बयान में कहा, अदालत का फैसला भारत और इंडोनेशिया के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाता है। प्रमुख विवरण, जैसे कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की समयसीमा और इंडोनेशिया से शुल्क-मुक्त वस्त्र निर्यात की मात्र, अभी तय नहीं हुए हैं।
भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन भेजने की योजना भी टाल दी है। इसमें कहा कि अदालत के फैसले से अमरीका की देश-विशिष्ट शुल्क लगाने की शक्ति सीमित होती है, जिससे व्यापार वार्ताओं में उसका दबाव कम होता है। बयान में कहा गया, हमारा मानना है कि ट्रंप शुल्क बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी रास्ते खोजेंगे और हमें आश्चर्य नहीं होगा यदि अमरीकी शुल्क शुक्रवार से पहले के स्तर के करीब पहुंच जाएं।
कुछ सरकारें अमरीका के साथ व्यापार समझौतों के अनुमोदन की प्रक्रिया धीमी कर सकती हैं, लेकिन अधिक दंडात्मक शुल्क के डर से उनके पूरी तरह पीछे हटने की संभावना कम है। बयान में कहा, यदि अमरीकी आयातक इस फैसले को अस्थायी राहत मानते हैं, तो वे शुल्क फिर से बढ़ने से पहले माल भेजने की जल्दबाजी कर सकते हैं।’
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