Stock Market Update: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ खुले। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की महंगी होती कीमतें और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों के रुख पर असर डाला।
बीएसई सेंसेक्स करीब 116 अंक की गिरावट के साथ 77,892 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी ने करीब 22 अंक टूटकर 24,343 के स्तर से कारोबार शुरू किया।
पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

अमेरिकी बाजार की कमजोरी का असर
भारतीय बाजार पर विदेशी संकेतों का भी असर देखने को मिला। शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रॉड मार्केट इंडेक्स करीब 0.2% गिरकर 7,785.76 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.3% टूटकर 26,729.16 पर पहुंच गया।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी 107.58 अंक यानी करीब 0.2% की गिरावट के साथ 53,732.41 पर बंद हुआ। अमेरिकी बाजार की कमजोरी के बाद एशियाई बाजारों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान सतर्क रुख देखने को मिला।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई 225 करीब 0.4% ऊपर कारोबार करता दिखा, जबकि टॉपिक्स में लगभग 0.11% की गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का बाजार छुट्टी के कारण बंद रहा।
घरेलू बाजार अब कंपनियों के तिमाही नतीजों के बड़े दौर से आगे बढ़ चुका है। ऐसे में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी बाजारों के संकेतों पर ज्यादा रहेगी।
ऑटो, एनर्जी और मेटल शेयरों पर दबाव
शुरुआती कारोबार में ऑटो, एनर्जी, मेटल और फार्मा सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव नजर आया। बाजार की दिशा तय करने में इन सेक्टर्स की चाल अहम हो सकती है।
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज, KPIL, ONGC और डॉ. रेड्डीज जैसे शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। इन कंपनियों से जुड़ी अलग-अलग कॉरपोरेट गतिविधियां इनके शेयरों में हलचल बढ़ा सकती हैं।
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निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर
फिलहाल बाजार में वैश्विक अनिश्चितता और तेल की कीमतों को लेकर सतर्कता बनी हुई है। अगर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की तेजी जारी रहती है, तो घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ सेक्टर और स्टॉक-विशेष गतिविधियों पर रहेगी।
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