नई दिल्ली: हाल के महीनों में सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिस सोने ने पिछले साल शानदार रिटर्न देकर निवेशकों को आकर्षित किया था, वही अब दबाव में नजर आ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है क्या यह गिरावट अस्थायी है या आगे और बड़ी कमजोरी देखने को मिल सकती है?
रिकॉर्ड ऊंचाई से तेज गिरावट
साल 2026 की शुरुआत में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद कीमतों में तेजी से गिरावट आई। कुछ ही महीनों में करीब 20% तक की कमजोरी दर्ज की गई, जिसने बाजार की धारणा को बदल दिया है।

तेजी के बाद गिरावट पुराना पैटर्न
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में बड़ी तेजी के बाद गिरावट कोई नई बात नहीं है। इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है जब सोना रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद लंबे समय तक नीचे आया।
1970 का दशक: तेज उछाल के बाद सोना करीब 40% से ज्यादा टूट गया था।
1980 का दौर: बड़ी तेजी के बाद कीमतों में 50% से ज्यादा गिरावट देखी गई।
2011 के बाद: लंबी तेजी के बाद सोना करीब 40% तक कमजोर हुआ।
इन सभी उदाहरणों से यह साफ होता है कि सोना अक्सर तेज रैली के बाद करेक्शन के दौर में जाता है।
गिरावट के पीछे क्या कारण होते हैं?
सोने की कीमतों पर कई वैश्विक फैक्टर असर डालते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
ब्याज दरों में बढ़ोतरी
अमेरिकी डॉलर की मजबूती
वैश्विक आर्थिक स्थिरता
भू-राजनीतिक तनाव में कमी
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने की बजाय अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव आता है।
2026 में कितना गिर सकता है सोना?
अगर ऐतिहासिक ट्रेंड को आधार मानें, तो सोने में अपने उच्च स्तर से 40% से 50% तक की गिरावट संभव मानी जाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी नीचे आ सकती हैं।
भारतीय बाजार की बात करें तो आने वाले समय में सोने का भाव करीब ₹85,000 से ₹91,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में पहुंच सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगा।
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निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मौजूदा हालात संकेत देते हैं कि सोने में उतार-चढ़ाव का दौर अभी जारी रह सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार के ट्रेंड को समझकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, सोने की कीमतों में गिरावट भले ही चिंता का कारण हो, लेकिन इतिहास बताता है कि यह चक्र का हिस्सा है जहां तेजी के बाद गिरावट और फिर नए अवसर पैदा होते हैं।