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मजदूरों को कभी मिलते थे चांदी के सिक्के, क्यों कर दिए सरकार ने बंद

 

नई दिल्ली: आज के दौर में चांदी की क्या वैल्यू है हम सभी जानते हैं।ऐसे में चांदी का सिक्का आज त्योहारों के समय तोहफे में दिया जाता है। लेकिन एक समय ऐसा था जब यही सिक्का सबकी जेब में मिलता था। 1 रुपये का सिक्का तब चांदी का ही होता था। भारत में पहला एक रुपये का सिक्का 1757 में जारी किया गया था। इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने जारी किया था। मिली जानकारी के अनुसार, इसका वजन 11.5 ग्राम के आसपास था। इस पर बिट्रेन का तत्कालीन राजा जॉर्ज II का चित्र अंकित था।

क्यों बंद हुए चांदी के सिक्के:

विश्व युद्ध-1 के समय चांदी की जरूरत पड़ी,चांदी की किल्लत के कारण ब्रिटिश सरकार के लिए उससे सिक्के बनाना काफी महंगा और मुश्किल हो गया। इसलिए सरकार ने सिक्के की जगह नोट छापना शुरू किया। नोट पर सिक्के की ही तस्वीर लगाई गई ताकि लोगों को 1 रुपये का नोट पहचानने में ज्यादा परेशानी ना हो। हालांकि, सिक्के की छपाई भी जारी रखी गई लेकिन उसमें सिल्वर की मात्रा लगभग आधी कर दी गई।

उसका सर्कुलेशन भी घटा दिया गया। 1947 तक ऐसा ही चला। 1950 में उसे पूरी तरह से बंद करके निकल के सिक्के जारी कर दिये गए। जो 1 रुपये, पचास पैसे, 25 पैसे, 10 पैसे, 5 पैसे, 2 पैसे और 1 पैसे के सिक्के थे। 1968 में 20 पैसे का सिक्का भी जारी किया गया. हालांकि, इसे ज्यादा पसंद नहीं किया गया। 70 के दशक में 1, 2 और 3 पैसे के कॉइन्स को बंद कर दिया गया।

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