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सरकार ने सब्सिडी वाले यूरिया का ‘दुरुपयोग’ रोकने के लिए बनाई नई कार्य योजना

नई दिल्ली: सरकार ने प्लाईवुड और अन्य उद्योगों को सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग पर अब जेल की सजा भी हो सकती है। जानकार सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय यूरिया के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ-साथ राज्यों के साथ समन्वय करेगा।
उसकी कृषि-ग्रेड यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए संयुक्त अभियान शुरू करने की भी योजना है। इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उद्योगों को कृषि-ग्रेड यूरिया के डायवर्जन या दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए कहा था। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को नीम-लेपित यूरिया 266 रुपये प्रति बैग (45 किलोग्राम) की अत्यधिक रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
जो औद्योगिक उपयोग के लिए तकनीकी-ग्रेड यूरिया से काफी सस्ता है। कृषि-ग्रेड यूरिया को राल (रेसिन)/गोंद, प्लाईवुड, क्रॉकरी, मोल्डिंग पाउडर, पशु चारा और औद्योगिक खनन विस्फोटक बनाने वाले उद्योगों में दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। सूत्रों ने कहा कि उर्वरक विभाग ने सब्सिडी के रिसाव को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसानों के हित प्रभावित न हों, खेती के यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए ‘व्यापक कार्ययोजना’ तैयार की है।
सूत्रों ने कहा, ‘‘कृषि ग्रेड यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल के मामले में अब किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। सूत्रों ने कहा कि ऐसे उदाहरण हैं कि कृषि-ग्रेड यूरिया की नीम कोंिटग को कुछ रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से हटा दिया गया और फिर औद्योगिक उद्देश्यों के लिए इनका उपयोग किया गया। कार्ययोजना के अनुसार, विभाग तकनीकी-ग्रेड यूरिया के बजाय कृषि-ग्रेड यूरिया का उपयोग करने वाले उद्योगों पर नकेल कसने के लिए वित्त और वाणिज्य सहित विभिन्न मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य सरकारों के साथ समन्वय करेगा।
इसमें माल एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) से मदद ली जाएगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्यों द्वारा एक संयुक्त अभियान भी जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, विभाग तकनीकी-ग्रेड यूरिया के घरेलू उत्पादन और आयात दोनों की कुल आपूर्ति की निगरानी करेगा, साथ ही उन उद्योगों द्वारा उत्पादित कुल माल पर भी नज़र रखेगा जिन्हें कच्चे माल के रूप में यूरिया की आवश्यकता होती है।
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